आगरा का अग्रवन, मुजफ्फरनगर का लक्ष्मीनगर, अहमदाबाद का नाम कर्णावती, शिमला का श्यामला तथा बिहार में मुगलों से जुड़े शहरों के नाम बदलने की मांग तेज़ी से उठने लगी है. इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का नाम अयोध्या किए जाने के बाद देश में शहरों और सड़कों के नाम बदलने का दौर चल पड़ा है.
UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का नाम अयोध्या किए जाने के बाद आगरा नार्थ से भाजपा विधायक जगन प्रसाद गर्ग ने UP के CM को पत्र लिख कहा है कि आगरा में बहुत सारे वन (जंगल) हैं और अग्रवाल (महाराजा अग्रसेन के अनुयायी) रहते हैं इसलिए शहर का नाम बदलकर ‘अग्रवन’ किया जाना चाहिए. गर्ग ने कहा कि इस क्षेत्र को शुरुआत में अग्रवन के नाम से जाना जाता था जिसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है, लेकिन समय के साथ, शहर को अकबरबाद के रूप में नामित किया गया और बाद में यह ‘आगरा’ बन गया, जिसका कोई विशेष अर्थ नहीं है. इसलिए इस शहर का नाम दोबारा से ‘अग्रवन’ किया जाना चाहिए.
गर्ग ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री से मिलूंगा और उनसे आगरा का नाम अग्रवन करने की मांग करूंगा। उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन के अनुयायी वैश्य समुदाय के लोगों की आगरा में करीब दस लाख आबादी है.
उधर भाजपा विधायक संगीत सोम ने कहा कि मुगलों ने शहरों के नाम बदल कर हिन्दुस्तान की सभ्यता, संस्कृति को नष्ट करने का काम किया, अब भाजपा सरकार इतिहास में दर्ज शहरों के पुराने नाम वापस कर रही है. उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर का नाम 1633 में किसी मुजफ्फर अली नामक नवाब के नाम से कर दिया गया था, जिसका कोई मतलब नहीं है. मुजफ्फरनगर का नाम प्राचीन नाम लक्ष्मीनगर था वही होना चाहिए, इसकी मांग सरकार की जाती है. साथ ही अन्य शहरों के प्राचीन नामों को भी बदला जाना चाहिए.


गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा है कि सरकार अहमदाबाद का नाम बदलने का विचार कर रही है. अगर ऐसा हुआ तो अहमदाबाद शहर का नाम कर्णावती हो जाएगा. रूपाणी ने कहा कि अहमदाबाद के नाम को कर्णावती करने पर बातचीत लंबे समय से चल रही है. कानूनी और अन्य सभी बातों को देखने के बाद ठोस कदम उठाए जाएंगे.
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा है कि अंग्रेजों के भारत आने से पहले शिमला को श्यामला के नाम से जाना जाता था, इसका नाम बदलने पर सरकार विचार कर रही है. विश्व हिंदू परिषद लंबे समय से शिमला का नाम श्यामला करने की मांग कर रहे हैं. विहिप के प्रदेश अध्यक्ष अमन पुरी ने कहा है कि गुलामी शारीरिक, मानसिक और सांस्कृतिक होती है. शोषकों द्वारा दिए गए नामों को ढोहना मानसिक गुलामी का प्रतीक है. आजादी के बाद देश में कई ब्रिटिश पहचान को खत्म किया गया, लेकिन हिमाचल में कई नाम उसी वक्त से चले आ रहे हैं. अंग्रेज श्यामला नहीं बोल पाते थे, इसलिए उन्होंने इसका नाम बदलकर शिमला कर दिया.
इसके पूर्व केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिहार और देशभर में मुगलों से जुड़े शहरों के नाम बदलने की मांग करते हुए कहा था कि बिहार के कई शहरों के नाम बदले जाने की जरूरत है. बिहार को खिलजी ने लूटा था और आक्रांताओं ने हमारे शहरों के नाम बदले थे. आज बिहार के बख्तियारपुर से लेकर कई शहर उन्हीं के नाम पर हैं, ऐसे में इन शहरों का नाम बदल देना चाहिए.
किसी शहर का नाम बदलने के लिए स्थानीय लोग या जनप्रतिनिधि एक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजते हैं. राज्य मंत्रिमंडल उस प्रस्ताव पर विचार कर मंजूरी देने के बाद राज्यपाल के पास सहमति के लिए भेजती है. राज्यपाल प्रस्ताव पर अपनी अनुंशसा के साथ उसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृहमंत्रालय के पास भेजते हैं और गृहमंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद राज्य सरकार नाम बदलने की अधिसूचना जारी करती है.
इन कवायदों के बीच कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि जब मानसिकता इतिहास को तोड़ने मरोड़ने और उसको फिर से लिखने की है तो नाम बदलना कोई मायने नहीं रखता. लोग बढ़ती कीमतों और महंगाई के बोझ से दबे हुए हैं. उनकी बेहतरी के लिए लोगों की जिंदगी बदलना ज्यादा महत्वपूर्ण है. वास्तव में लोगों को नामों में दिलचस्पी नहीं है, देश के नौजवान रोजगार चाहते हैं, किसान आय की सुरक्षा चाहते हैं, माताएं और बेटियां सुरक्षा चाहती हैं.

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