जासूसी के आरोप में 16 वर्ष जेल में बरसों गुजारने के बाद पाकिस्‍तानी कैदी जलालुद्दीन ने अपनी रिहाई के वक्त श्रीमद्भागवत गीता अपने साथ ले जाने की इच्‍छा जतायी तथा रिहा होने से पहले जेल अधिकारियों के माध्यम से गृह मंत्रालय को भेजे एक पत्र में उसने लिखा कि- ‘मेरी ख्‍वाहिश है कि यूएसए, यूके, यूएई की तरह ही हमारे सार्क देश से भी एलओसी खत्‍म हो जाए, हम सब एक हो जायेंगे तो कोई भी देश बुरी नजर से देखने की हिम्‍मत नहीं कर सकेगा.
वाराणसी के कैंटोनमेंट एरिया में एयरफोर्स ऑफिस के पास से 16 साल पहले पाकिस्‍तान के सिंध प्रांत के ठट्ठी जिले के रहने वाले जलालुद्दीन को जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उसके पास से सेना से संबंधित डाक्‍यूमेंट्स व आर्मी कैंप के नक्‍शे बरामद हुए थे और तब से वह शिवपुर सेंट्रल जेल में बंद था. जलालुद्दीन को वर्ष 2003 में कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में 33 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी, बाद में हाईकोर्ट ने उसकी सजा को 16 साल कर दिया. 16 साल की सजा पूरी हो जाने तथा गृह मंत्रालय का आदेश मिलने पर जलालुद्दीन को बाघा बार्डर तक छोड़ने की प्रक्रिया पूरी की गई है.
हाईस्‍कूल पास जलालुद्दीन जेल में आगे की पढ़ाई करने के साथ ही श्रीमद्भागवत गीता का भी अध्‍ययन करता था. जेल से ही उसने एमए तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद इलेक्ट्रीशयन का कोर्स किया. जलालुद्दीन इसके साथ ही जेल में होने वाली जेल प्रीमियर लीग में अंपायरिंग भी करता था.
जलालुद्दीन ने रिहा होने से पहले एक पत्र जेल अधिकारियों के जरिए गृह मंत्रालय को भेजा है. पत्र में उसने लिखा है कि- मेरी ख्‍वाहिश है कि यूएसए, यूके, यूएई की तरह ही हमारे सार्क देश से भी एलओसी खत्‍म हो जाए. हम सब (सार्क देश) एक हो जाएं तो दुनिया का कोई भी देश बुरी नजर से देखने की हिम्‍मत नहीं कर सकेगा.


जलालुद्दीन ने पत्र में यह भी लिखा है कि 16 साल हिंदुस्‍तान की जेल में गुजारने के दौरान उसे कभी यह एहसास नहीं हुआ कि वह किसी दूसरे मुल्‍क की जेल में है. कुछ कट्टरपंथी लोगों ने तो दोनों देशों को अलग करवा दिया लेकिन आज भी दिल को अलग नहीं कर सके हैं. जेल में मिले प्‍यार और सहारे ने, न घर की याद आने दी और न कभी यह एहसास होने दिया कि मैं अपने वतन से दूर हूँ. इस दौरान ईद-दीपवाली और बाकी सारे सारे त्‍यौहार मिल कर मनाए.
जेल प्रशासन का शुक्रिया अदा करते हुए जलालुद्दीन ने पत्र में लिखा कि ‘मुझे जेल प्रशासन ने कभी ये एहसास नहीं होने दिया कि मैं एक पाकिस्तानी कैदी हूं. शिवपुर सेंट्रल जेल के वरिष्‍ठ अधीक्षक अंबरीश गौड़ का कहना है कि सजा काटने के दौरान जलालुद्दीन की जिंदगी और सोच में आए बदलाव का सबूत है कि जब वह वतन वापसी के लिए निकला तो श्रीमद्भागवत गीता साथ ले गया.

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