प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात में नर्मदा किनारे 182 मीटर ऊंची सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण करने के 2 दिन बाद ही यह खबर आई कि योगी अयोध्या में सरयू के किनारे भगवान राम की 151 मीटर ऊंची तांबे की प्रतिमा बनवाएंगे. पटेल की प्रतिमा में लोहे का ज्यादा इस्तेमाल हुआ है. योगी शुक्रवार को सरदार पटेल की प्रतिमा देखने गुजरात भी गए थे. ऐसे में इन कयासों को बल मिल रहा है कि योगी सधे पांव मोदी से कदम मिला रहे हैं.
सीएम बनने के बाद एक ऐसा वक्त आया था जब मीडिया में मोदी की अपेक्षा योगी की चर्चा ज्यादा होने लगी थी. योगी कब उठते हैं, कब पूजा करते हैं, यहां तक कि क्या खाते हैं इसकी भी जानकारी और फोटो बाहर आने लगी थी. मीडिया का तर्क था कि लोग योगी के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं.
सीएम बनने के बाद योगी ने दौरों की झड़ी लगा दी थी, यूपी में कमान हाथ में लेते ही क्राइम के आंकड़ों में भी कमी देखे जाने लगी. इसके बाद एनकाउंटर की पॉलिसी ने योगी को हिंदीभाषी राज्यों में चर्चा में ला दिया. सूत्रों के मुताबिक बढ़ते कद को देखते हुए आलाकमान की तरफ से योगी तक यह संदेश पहुंचा दिया गया कि ज्यादा तेज चलना ठीक नहीं है. इसके बाद योगी ने अपनी रफ्तार कम भी कर दी लेकिन अब माना जा रहा है कि अब धीरे-धीरे ही सही वह अपनी पकड़ मजबूत करते जा रहे हैं. वो कौन सी खासियतें हैं जो योगी को मोदी के सामने खड़ा करती हैं, डालते हैं एक नजर.
कट्टर हिंदुत्व ने दोनों नेताओं को पहचान दी. मोदी पर भले ही गुजरात दंगों के आरोप लगे लेकिन जनमानस में इस धारणा को बल मिला कि यही आदमी हिंदुओं की रक्षा कर सकता है. योगी को गोरक्षपीठ का आशीर्वाद मिला, योगी के तेवरों को देखते हुए गोरखपुर से कई बार सांसद रहे महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. सीएम बनने से पहले ही पूर्वी यूपी में लोग मानने लगे थे योगी के रहते हिंदू सुरक्षित है. आज भी इस इमेज को बरकरार रखने में योगी कामयाब रहे हैं.
मोदी को जिस तरह बीजेपी का फायर ब्रांड नेता माना जाता है उसी तरह योगी के बारे में भी धारणा बनी हुई है. सरकार में रहने के दौरान योगी ने आग उगलना भले ही थोड़ा कम कर दिया हो लेकिन विपक्ष में रहने के दौरान जिन लोगों ने योगी का भाषण सुना है वो याद करते हैं कि किस तरह अपने भाषणों से वह जनमानस को उसी तरह मुरीद बना लेते थे जिस तरह मोदी किया करते थे. आज भी योगी सभाओं में अपना अलग रंग दिखा देते हैं.
चुनाव के दौरान मोदी के लिए जिस तरह जनसभाओं में आवाज उठा करती थी कि हमारा पीएम कैसा हो उसी तरह यूपी के चुनावी सभाओं में नारे लगा करते थे कि हमारा सीएम कैसा हो. लोगों के बीच से ही जवाब आता था कि योगी जैसा हो. हालांकि जातीय समीकरणों को देखते हुए भाजपा ने यूपी में किसी चेहरे को प्रोजेक्ट नहीं किया था. लेकिन आलाकमान तक यह बात पहुंच गई थी कि अगर हिंदुत्व को लेकर आगे बढ़ना है तो योगी को ही आगे करना होगा.
मोदी के बारे में कहा जाता है कि वह हर रोज 16 घंटे काम करते हैं, योगी के बारे में कहा जाता है कि वह केवल 4 घंटे ही सोते हैं, जिस तरह मोदी योग को समय देते हैं उसी तरह योगी पूजा और ध्यान को देते हैं. दोनों के पास परिवार नहीं है, जितना भी समय है वह देश और प्रदेश के लिए है. अपनी ब्रांडिंग को लेकर दोनों सजग हैं, मोदी जहां अपने पहनावे को लेकर फेमस हैं उसी तरह योगी भगवाधारी हैं, कुर्ते से लेकर कुर्सी तक हर जगह भगवा देखने को मिलता है.
किसी भी प्रदेश में चुनाव हो रहा हो रहा है सबसे पहली डिमांड मोदी की होती है उसी तरह प्रदेश में सबसे ज्यादा डिमांड योगी की होती है. यूपी में सरकार बनने के बाद जिन राज्यों में चुनाव या उप चुनाव हुए हैं योगी को बुलाया जाता रहा है. योगी का कद किस तरह से बढ़ रहा है इसका उदाहरण छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ उनकी फोटो है जिसमें बताया गया कि उन्होंने योगी का पैर छूकर चुनाव अभियान की शुरूआत की. यूपी में संसद की सीटों के लिए हुए उप चुनाव में प्रचार के लिए मोदी के न जाने और योगी का पूरी जान लड़ा देने के भी अलग-अलग मायने निकाले गए. राजनीतिक समीक्षकों का कहना है अगर मोदी नहीं जाते हैं तो जीत नहीं मिलने वाली यह दिखाने के लिए मोदी नहीं गए. हालांकि कुछ लोग ऐसा भी कहते हैं कि पीएम उपचुनाव में प्रचार करने जाने से परहेज करते रहे हैं. वहीं योगी ने जमकर प्रचार किया, लेकिन हार के बाद भी कहीं महसूस नहीं होने दिया कि यह उनकी हार है.
मोदी का सत्ता में आना एक उदाहरण माना गया कि देश में विकास सबसे बड़ा मुद्दा है. सीएम रहते हुए उन्होंने गुजरात को एक मॉडल की तरह पेश किया. अपने भाषणों से मोदी देश की जनता को यह विश्वास दिलाने में सफल रहे कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो गुजरात जैसी चमक पूरे देश में दिखाई देगी. योगी ने सपा के कुशासन को अपना मुद्दा बनाया, एक कट्टर नेता की छवि बनाए रखते हुए भी आलाकमान तक यह संदेश पहुंचाने में सफल रहे कि उनमें यूपी को विकास की राह पर ले जाने का माद्दा है. दोनों अपने-अपने वादों पर खरा उतरने की कोशिश कर रहे हैं.
योगी आज के समय में सबसे ज्यादा दौरा करने वाले मुख्यमंत्री हैं, आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्रियों में वो गूगल में सबसे ज्यादा सर्च किए जाते हैं. यानी पब्लिक में उनकी पहचान बड़ी हो रही है. कहा यह भी जा रहा है कि अगर वह भगवान राम की 151 मीटर ऊंची प्रतिमा बनवाने में सफल रहे तो उनका कद ऊंचा होना तय है.
पिछले साल योगी सरकार ने 100 मीटर ऊंची भगवान राम की प्रतिमा लगाने की योजना का एलान किया था. तब ‘नव्य अयोध्या’ योजना के तहत धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने राज्यपाल राम नाईक को प्रपोजल भी दिखाया था. लेकिन एक साल में यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई. सवाल उठ रहे हैं आखिर एक साल में मूर्ति की ऊंचाई 51 मीटर क्यों बढ़ानी पड़ गई. क्या ऐसा इसलिए किया गया कि इससे इतनी ऊंचाई की मूर्तियां और भी हैं जिससी चर्चा में आना थोड़ा कठिन था. क्या पटेल की मूर्ति को देखकर योगी ने इरादा बदल दिया है.
2014 में मोदी के नाम की घोषणा होने के पहले पीएम पद के दावेदारों में कई नामों की चर्चा थी. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बारे में कहा गया कि उनमें सबको लेकर चलने की क्षमता है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर पार्टी उन्हें जिम्मेदारी सौंपती है तो वह तैयार हैं. लेकिन आज अगर मोदी की लोकप्रियता के आगे किसी सीएम की बात होती है तो योगी को नकारा नहीं जा सकता.

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