टंडवा प्रतिनिधि: सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरों रांची की विशेष टीम द्वारा 26 सितम्बर 2018 को रेनबो ग्रुप के अध्यक्ष वरुण रवानी व निदेशक विष्णु रवानी के भौंरा गौरखूंटी स्थित आवास, बैंकमोड़ धनबाद व गया इमामगंज स्थित कार्यालय एक साथ छापेमारी की गई थी. छापामारी की ख़बर पढ़ कर निवेशकों को चिंता बढ़ गई और जमा पैसा की जानकारी लेने एजेंटो के घर और कार्यलय की दरवाज़ा पर भटकना शुरू कर दिया। इनमे बड़ी संख्या में महिलाएं जमा राशि की जानकारी लेना चाहते हैं।

ये कहानी नही हक़ीक़त है नवीनगर प्रखंड के टंडवा पंचायत के खजुरी टिका गांव के लोंगो ने जहां पे बड़ी संख्या में रेनबो ग्रुप ऑफ़ कंपनीज में अपना पैसा निवेश किये हैं जो आज पैसे केलिए पुलिस को आवेदन थक दे छूके हैं कुछ ग्रामीण जैसे अब्दुल गनी 2 लाख 60 हजार, आबिद अंसारी उर्फ़ अजीमुद्दीन 5 लाख़, रमा खातुन 11 हजार, अरसद हुसैन 10 हजार, आरिफ 15 हजार, युसूफ अंसारी 4 लाख, साहिन खातुन 3 लाख़ 50 हजार, नुरजंहा खातुन 70 हजार, आस मोहम्मद 75 हजार, सराफत टेलर 60 हजार, आसिफ 1 लाख, शरजहाँ खातुन 20 हजार, शम्मा खातुन 76 हजार, शायरा खातुन 44 हजार, कमरे आलम 40 हजार, मोबिन 3 लाख 50 हजार, सद्दाम हुसैन 21 हजार, इशरत 20 हजार, सलीम अंसारी 50 हजार, गुलनाज 18 हजार, रौशन खातुन 50 हजार, फरहत नाज़ 26 हजार, रिफत खातुन 15 हजार, शहनाज़ खातुन 25 हजार, रूकसाना 20 हजार, बेलाल 37 हजार, अमीरण खातुन 16 हजार, नुरुल्लाह 1 लाख 30 हजार, जुलेखा खातुन 52 हजार, मो अमीर 50 हजार, सुलतान 1 लाख 20 हजार, हस्बुन नेशा 25 हजार, सलाउद्दीन 45 हजार, इसफ़ाक़ अंसारी 50 हजार, बसिरा खातुन 50 हजार, मरियम खातुन 30 हजार, असलम अंसारी 50 हजार, शकीला खातुन 20 हजार, नुशरत खातुन 16 हजार, जयराम प्रजापत 70 हजार व तुलसी पंडित 70 हजार इतने लोगो ने अपने नाम दर्ज करा दुःख प्रकट किया न जाने अभी इसी गांव में कितने घर के लोग इस ग्रुप से जुड़े होंगे। ये तो एक गांव के कुछ घरो का है जबकि बिहार, झारखण्ड, बंगाल और उड़ीसा सहित कई राज्यों में रेनबो ग्रुप का ब्यवसाय है।
निवेशकों का विश्वास कब से हटना शुरू हुआ उसपे एक नजर-
रेनबो ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक धीरेन रवानी की गोली मार कर हत्या 17 अगस्त 2017 को चचेरे भाई शंकर रवानी के बेटे कुणाल रवानी ने उन्हें गोली मार दी थी. गोली चलाने के बाद कुणाल को स्थानीय लोंगो ने मौके पर ही दबोच लिया था। आक्रोशित की पिटाई से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया बाद में उसकी मौत हो गई। वर्षो से दोनों भाईयों में चल रहा था विवाद। नन बैंकिंग कम्पनी के कचड़े में फंस कर धीरेन रवानी कई महीनों तक जेल में भी रह चुके थे। यही कारण है कि आज कंपनी का हालत नाज़ुक बना हुआ है।
टंडवा से मो फखरुद्दीन की रिपोर्ट

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