एक और युवा क्रिकेटर यशस्‍वी जायसवाल चर्चा के केंद्र में है, जिसे भारतीय क्रिकेट के भविष्‍य का सितारा माना जा रहा है. बाएं हाथ का ओपनर बल्‍लेबाज जायसवाल हाल ही में बांग्‍लादेश में आयोजित अंडर-19 एशिया कप (U-19 Asia Cup) की विजेता बनी टीम का हिस्‍सा था.
भारतीय टीम की खिताबी जीत में यशस्‍वी का अहम योगदान था. उसने न सिर्फ श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मुकाबले में ने 85 रन की बेहतरीन पारी खेली बल्कि पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्‍छा प्रदर्शन करने के कारण यशस्‍वी को मैन ऑफ द टूर्नामेंट भी घोषित किया गया. टूर्नामेंट में यशस्‍वी ने 79.50 के बेहतरीन औसत से कुल 318 रन बनाए थे. यशस्‍वी का बचपन अभावों के बीच गुजरा है लेकिन उन्‍होंने इसे कभी अपने क्रिकेट के आड़े नहीं आने दिया. क्रिकेट के प्रति जुनून, अपनी मेहनत और खेल कौशल के बल पर यशस्‍वी इतनी ऊंचाई पर पहुंच पाया है.
उत्तर प्रदेश के भदोही निवासी यशस्‍वी ने क्रिकेट में अपना कैरियर बनाने के लिए 11 वर्ष की उम्र में मुंबई जाने का फैसला किया. 2012 में मुंबई आने के बाद उनका शुरुआती दिन बेहद मुश्किल भरा था. उनके पास रहने की कोई जगह नहीं थी. शुरुआत में एक डेरी शॉप उनके सोने का ठिकाना बना लेकिन कुछ समय बाद उन्‍हें वहां से भी बाहर कर दिया गया. बाद में एक ग्राउंड्समैन ने उन्‍हें आजाद मैदान पर मुस्लिम यूनाइटेड क्‍लब के टेंट में रहने की जगह दी, जहां बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं थीं. जीवनयापन के लिए यशस्‍वी ने सड़क किनारे लगने वाले खाने के ठेले पर काम करना पड़ा. संघर्षपूर्ण इस जीवन के बावजूद यशस्‍वी ने क्रिकेट में मेहनत जारी रखी.
यशस्‍वी के अनुसार जब क्रिकेट के उनके साथी आजाद मैदान के पास खाने के लिए ठेले पर आते थे तो उन्‍हें खाना सर्व करते हुए अच्‍छा नहीं लगता था पर क्रिकेट के प्रति जूनून ने उनसे सब कुछ करवाया. अभ्‍यास के दौरान कोच ज्‍वाला सिंह ने यशस्‍वी की प्रतिभा को पहचाना और उसके बाद ही इस बाल खिलाड़ी की जिंदगी बदली. ज्‍वाला सिंह ने 12 वर्षीय यशस्‍वी की बैटिंग से बेहद प्रभावित हुये. तब वह ए डिवीजन के बॉलर का बेहतरीन तरीके से सामना कर रहा था. ज्‍वाला सिंह को पता चला कि यशस्‍वी रहने के लिए ठिकाने की तलाश में है और उसका कोई कोच भी नहीं है.
ज्‍वाला सिंह ने यशस्‍वी को अपनी शागिर्दी में ले लिया. उनके मार्गदर्शन में यशस्‍वी का कौशल निखरता गया. जल्‍द ही यशस्‍वी को मुंबई की अंडर-16 टीम में जगह मिली और फिर भारतीय अंडर-19 टीम में. ज्‍वाला सिंह के अनुसार यशस्‍वी स्पिन गेंदबाजी भी करते हैं. पिछले तीन साल में यशस्‍वी ने 51 शतक बनाए हैं और करीब 300 विकेट लिए हैं. ज्‍वाला सिंह का मानना है कि उनका शिष्‍य यशस्‍वी एक दिन टीम इण्डिया का सदस्य बनेगा. जिसकी झलक उसने भारत की अंडर-19 टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए दे दी है.
भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम ने 7 अक्टूबर को 144 रनों से श्रीलंका को रौंदकर छठी बार एसीसी अंडर-19 एशिया कप पर कब्जा किया था. इससे पहले 1989, 2003, 2013-14, 2016 में तथा 2012 में पाक के साथ संयुक्त रूप से यह खिताब जीता था. तब कुआलालंपुर में भारतीय टीम और पाकिस्तानी टीम के बीच खेला गया फाइनल मुकाबला टाई रहा था.
भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में 3 विकेट पर 304 रन का बड़ा स्कोर बनाने के बाद श्री लंकाई टीम को 38.4 ओवर में 160 रन पर समेट दिया. फाइनल में भारतीय टीम ने टॉस जीत पहले बल्लेबाजी करते हुए ओपनर यशस्वी जायसवाल (85) और अनुज रावत (57) द्वारा पहले विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी की थी. यशस्वी ने 113 गेंदों की अपनी पारी में 8 चौके और 1 छक्का लगाया था.

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