भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- “ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो” इस चर्चित पंक्ति वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत बेहद नाजुक है और पिछले 40 घंटे से उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ है. उन्हें देखने (AIIMS जाने वालों का ताँता लगा हुआ है, तमाम दलीय गोलबंदी से उपर उठकर पुरे देश में उनके लिए प्राथना की जा रही है. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें देखने AIIMS पहुंचे, जहाँ उन्हें वेंटिलेटर में रखा गया है.
PM करीब 45 मिनट से ज्यादा समय तक AIIMS में रहे. हाँलाकि PM रोजाना वाजपेयी जी के मेडिकल कंडीशन की जानकारी ले रहे हैं और इससे पहले भी कई बार वाजपेयी को देखने एम्स जा चुके हैं. 93 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता श्री वाजपेयी 11 जून से ही अस्पताल में भर्ती हैं. बताया जाता है कि एम्स में भर्ती अटल बिहारी वाजपेयी की हालत पिछले 40 घंटे में ज्यादा बिगड़ गई है. उनके यूरिन, सीने और किडनी में इंफेक्शन बढ़ गया है, डॉक्टरों का एक पैनल लगातार उनकी निगरानी कर रहा है.
गुरुवार को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व PM मनमोहन सिंह, संघ प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा के वरिष्ट नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, स्मृति ईरानी, सुरेश प्रभु, जितेंद्र सिंह, हर्षवर्धन, अश्विनी चौबे, शहनवाज हुसैन, फारुख अब्दुल्ला, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और और मीनाक्षी लेखी समेत कई लोगों ने AIIMS जाकर वाजपेयी की सेहत का हाल जाना था.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मैं अटलजी के खराब स्वास्थ्य को लेकर दुखी हूं, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर अटल बिहारी वाजपेयी के जल्द ठीक होने की कामना की. अकाली नेता हरसिमरत कौर बादल ने भी प्रार्थना की. पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी वाजपेयी का हालचाल जानने के लिए एम्‍स पहुंचने वाले हैं
29 जून को PM मोदी ने वाजपेयी जी से मिलने के बाद मीडिया से कहा था कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है. किडनी में संक्रमण, छाती में संकुलन और पेशाब कम होने के चलते वाजपेयीजी को में भर्ती कराया गया था. वाजपेयीजी डिमेंशिया नामक एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और 2009 से ही व्हीलचेयर पर हैं.


कवि, पत्रकार व प्रखर वक्ता अटल बिहारी वाजपेयी 16 मई से 1 जून 1996 तथा फिर 19 मार्च 1998 से 22मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने के संकल्प के साथ आजीवन भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे. वाजपेयीजी भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में थे और 1968 से 73 तक इसके अध्यक्ष भी रहे. राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य, वीर अर्जुन और दैनिक स्वदेश आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन किया. वाजपेयीजी पहले गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनायी और 5 साल का कार्यकाल पूरा किया. जो उनके नेतृत्व क्षमता को बयाँ करता है.
मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी (आगरा के बटेश्वर नामक स्थान के मूल निवासी) और उनकी सहधर्मिणी कृष्णा वाजपेयी के पुत्र अटल बिहारी वाजपेयीका जन्म ग्वालियर रियासत के शिन्दे की छावनी में 25 दिसम्बर 1924 को हुआ था. इनके पिता अध्यापन कार्य करने के साथ ही हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे. पुत्र को भी काव्य गुण वंशानुगत परिपाटी से प्राप्त हुआ. अटल जी की बी०ए० की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई. छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे. कानपुर के डी०ए०वी० कालेज से राजनीति शास्त्र में एम०ए० की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने कानपुर में एल०एल०बी० की पढ़ाई प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही छोड़ पूरी निष्ठा से RSS के कार्य में जुट गये. डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ पढ़ा.
“भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो” उनकी सर्वाधिक चर्चित पंक्ति रही है. वो पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया. सबसे लम्बे समय तक सांसद रहने के साथ ही जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक प्रधानमंत्री रहे. वह पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गठबन्धन सरकार को स्थायित्व देते हुए उसका सफलता पूर्वक संचालन करते हुए कार्यकाल पूरा किया.

भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक वाजपेयीजी 1968 से 1973 तक उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे. 1955 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु विजयी नहीं हुए. पहली बार 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा पहुँचे. तबसे 1977 तक लगातार बीस वर्ष जनसंघ संसदीय दल के नेता रहे. जनता पार्टी की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और मोरारजी देसाई की सरकार में सन् 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहते हुए विदेशों में भारत की एक उज्ज्वल छवि बनायी.
जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर जनता पार्टी छोड़ 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की और उसके अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन किया. दो बार राज्यसभा के लिये निर्वाचित हुए तथा लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने 1997 में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली. 19 अप्रैल 1998 को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में देश ने प्रगति के अनेक आयाम छुए.
2004 में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये चुनावों में भाजपा ने भारत उदय (इण्डिया शाइनिंग) का नारा देते हुए चुनाव लड़ा. इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला और वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने केन्द्र में सरकार बनाई. बाद में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया और 6ए, कृष्णामेनन मार्ग, नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास में रहे.
उनकी सरकार ने 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया. उन्होंने यह सब इतनी गोपनीयता से किया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीकी से संपन्न पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी. यही नहीं इसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए लेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊचाईयों को भी छुआ.
19 फ़रवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की और इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी जी ने स्वयं पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की. हाँलाकि कुछ ही समय पश्चात् पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया. अटल सरकार ने पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन न करने की अंतर्राष्ट्रीय सलाह का सम्मान करते हुए धैर्यपूर्वक किंतु ठोस कार्यवाही करके भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया.
भारत भर के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल प्रोजैक्ट) की शुरुआत की जिसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्ग से जोड़ा गया. अटल जी के शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ वह अपने आप में एक इतिहास बन गया. वाजपेयी सरकार ने एक सौ साल से भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया, संरचनात्मक ढाँचे के लिये कार्यदल, सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, विद्युतीकरण में गति लाने के लिये केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग का गठन किया, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास; नई टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत करके बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले कदम उठाये तथा राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति गठित कीं.
यही नहीं वाजपेयी सरकार ने आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतें नियन्त्रित करने के लिये मुख्यमन्त्रियों का विशेष सम्मेलन बुलाया, उड़ीसा के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र के लिये सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया, आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया तथा ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिये बीमा योजना शुरू की.
अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक शानदार कवि भी हैं. उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी. मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह है. अटल जी की कुछ प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ मेरी इक्यावन कविताएँ, मृत्यु या हत्या, कैदी कविराय की कुण्डलियाँ, राजनीति की रपटीली राहें, सेक्युलर वाद, अमर आग है, बिन्दु बिन्दु विचार, संसद में तीन दशक, कुछ लेख: कुछ भाषण तथा अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह) प्रमुख हैं. विख्यात गज़ल गायक जगजीत सिंह ने अटल जी की चुनिंदा कविताओं को संगीतबद्ध करके एक एल्बम भी निकाला था.
अटल बिहारी वाजपेयी को जीवन में कई पुरस्कार मिले हैं जिनमें 2014 में मिला भारत रत्न, 1992 में मिला पद्म विभूषण, 1994 में श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार, 1994 में मिला भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत तथा लोकमान्य तिलक पुरस्कार तथा बांग्लादेश सरकार द्वारा 2015 में प्रदत्त ‘फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड’ प्रमुख है. उन्हें 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय तथा 2015 में मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा डी लिट की उपाधि भी दी गयी.

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