भारत की मांगों पर पाकिस्‍तान के जवाब को खारिज करते हुए पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर के मामले में पाकिस्तान पर विश्वास नहीं किया जा सकता. यह भारत के लिए सिर्फ एक धार्मिक एजेंडा है, जबकि पाकिस्तान ने इसे एक विनाशकारी एजेंडा बना रखा है. कॉरिडोर के बहाने पाकिस्तान के PM शांति की बात करते हैं और वहाँ की आर्मी चीफ शैतानी दिमाग लगते हैं.
कांग्रेसी मुख्‍यमंत्री ने सिख श्रद्धालुओं की संख्या सीमित किए जाने तथा पासपोर्ट संबंधी पाकिस्तान के सुझावों पर भी असहमति जाहिर करते हुए कहा कि इससे तो कॉरिडोर बनाने के वास्‍तविक उद्देश्‍यों को हासिल ही नहीं किया जा सकेगा. हमने विशेष अवसरों पर पन्द्रह हजार सिख श्रद्धालुओं को अनुमति देने की मांग की, जिसपर पाकिस्तान राजी नहीं है. हम पासपोर्ट बनवाने की पाकिस्तान की बात से भी इत्तेफाक नहीं रखते हैं, क्योंकि फिर कॉरिडोर का मतलब ही क्या हुआ?
कैप्टन ने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर भारत के लिए सिर्फ एक धार्मिक एजेंडा है, जबकि पाकिस्तान ने इसे अपना विनाशकारी एजेंडा बना रखा है. इसके बहाने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान शांति की बात करते हैं और साथ ही उनके आर्मी चीफ इस पर अपना शैतानी दिमाग चलाने लगते हैं.
कैप्‍टन ने कहा कि पिछले सत्तर साल से सिख श्रद्धालु करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन से वंचित हैं, इसलिए उन्‍हें हर दिन दर्शन करने की अनुमति दी जानी चाहिए. कैप्‍टन का यह बयान दोनों देश के डेलिगेशन के बीच वाघा-अटारी बॉर्डर पर करतारपुर कॉरिडोर बनाने के तौर-तरीकों पर हुई बातचीत के बाद आया है. बैठक के बाद भारत-पाकिस्तान के संयुक्त बयान में बताया गया था कि करतारपुर कॉरिडोर से जाने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा के तौर-तरीकों और समझौते के प्रारूप पर चर्चा हुई.
बताया जाता है कि बातचीत के दौरान भारत ने रोज़ 5 हजार और विशेष मौकों पर 15 हजार सिख श्रद्धालुओं को दर्शन करने की सुविधा देने की मांग की है, जिसपर पाकिस्‍तान राजी नहीं है. वह प्रतिदिन मात्र 500 लोगों को अनुमति देने की बात कह रहा है, जबकि विशेष मौकों के सन्दर्भ में कुछ बोला ही नहीं. यही नहीं वो सप्‍ताह में मात्र 3- 4 दिन ही सिख श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति देना चाहता है. पाकिस्‍तान की इन्‍हीं पैतरेबाज़ी पर कैप्‍टन ने बयान दिया है.
पाकिस्तान ने एक ओर दुनिया को बताया कि वह श्रद्धालुओं को वीजा मुक्त प्रवेश देगा, लेकिन अब वह मोटी फीस के साथ प्रत्येक श्रद्धालु को विशेष परमिट देने की बात कर रहा है. यही नहीं गुरुद्वारे के लिए महाराजा रणजीत सिंह और कुछ अन्य सिख सेवकों द्वारा दान किये गये जमीन के कुछ हिस्सों पर पाक सरकार ने कब्जा कर लिया है. गुरुद्वारे की कानूनी जमीन लेने पर विरोध जताते हुए भारत सरकार ने इसे गुरुनानक देव के भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ बताया है.
करतारपुर कॉरिडोर पाकिस्तानी शहर करतारपुर में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब को पंजाब के गुरदासपुर शहर से जोड़ेगा, जिससे भारतीय सिख श्रद्धालु आसानी से गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन कर सकेंगे. भारत में इसका करीब दो किलोमीटर और पाकिस्तान में करीब तीन किलोमीटर का हिस्सा होगा, जिसे चार महीने में बनाने का लक्ष्य रखा गया है. भारत करतारपुर गलियारे के लिए 190 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक यात्री टर्मिनल भवन का निर्माण भी करने वाला है.


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