केंद्र सरकार पांच वर्ष में अल्पसंख्यक समुदाय के 5 करोड़ छात्रों को छात्रवृत्ति देगी, जिसमें 50 प्रतिशत लड़कियां शामिल होंगी. साथ ही मदरसों में छात्रों को कम्प्यूटर और विज्ञान की शिक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी.
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि केंद्र और राज्यों की प्रशासनिक सेवाओं, बैंक सेवाओं, एसएएससी, रेलवे और दूसरी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग की सुविधा मुस्लिम, क्रिश्चियन, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों के आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को मिलेगी. इसके लिए अगले ही महीने से कार्यक्रम शुरू किये जायेंगे.
नकवी ने कहा कि मोदी सरकार ने स्वस्थ और समेकित विकास का वातावरण तैयार किया है, जिसके तहत हम सांप्रदायिकता की बीमारी और तुष्टिकरण की राजनीति को खत्म कर देंगे. हमारी सरकार समावेशी विकास और सर्वस्पर्शी विश्वास के लिए प्रतिबद्ध है और हमने साबित कर दिया कि न्याय और एकता के लिए काम कर रहे हैं.
नकवी ने कहा कि पूरे देश में पढ़ो-बढ़ो जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा, जिसका फोकस लड़कियों पर रहेगा. नुक्कड़ नाटकों, शॉर्ट फिल्म और सांस्कृति कार्यक्रमों के जरिए शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पहले चरण में अल्पसंख्यक बाहुल्य के 60 जिले चिह्नित किए गए हैं. देश भर के मदरसा टीचरों को शिक्षण संस्थानों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कम्प्यूटर जैसे विषयों की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को मुख्यधारा के विषयों की शिक्षा भी दे सकें. मदरसों में यह प्रोग्राम अगले महीने से ही शुरू हो जायेगा.
नकवी ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों, आईआईटी, पॉलीटेक्निक, महिला छात्रावास, गुरुकुल पद्यति पर आधारित स्कूलों और सामुदायिक सेवा केंद्रों का विकास और निर्माण प्रधानमंत्री जनविकास योजना के तहत ऐसे इलाकों में किया जाएगा, जहां शैक्षणिक ढांचा का अभाव है.
नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय की वे लड़कियां जो किसी कारणवश स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाती हैं, उन्हें ब्रिज कोर्स के जरिए शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में ये कोर्स शुरू किए जाएंगे. अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास निश्चित करने के लिए 10वीं के पहले और बाद में दी जाने वाली छात्रवृत्ति में उनकी संख्या 50% निर्धारित की जा रही है और बेगम हजरत महल बालिका छात्रवृत्ति योजना के तहत भी आर्थिक रूप से कमजोर दस लाख छात्राओं को स्कॉलरशिप दी जाएगी.


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