वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा कि 1995 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को बीस हल्के तेजस एयरक्राफ्ट का आर्डर दिया गया था, लेकिन 34 साल बाद कंपनी अभी तक सिर्फ 10 लड़ाकू विमान ही वायुसेना को दे सकी है. धनोआ ने यह बात राफेल डील में एचएएल को कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिए जाने को लेकर सवाल पूछने पर कही.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल का ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट एचएएल से लेकर अनिल अंबानी की कंपनी को देने का लगातार आरोप लगा रह हैं. हालांकि, विवाद को दरकिनार कर मोदी सरकार राफेल डील पर आगे बढ़ चुकी है और 25% रकम भी फ्रांस को चुकाया जा चुका है.
भारत सरकार ने 126 राफेल खरीदने के लिए जनवरी 2012 में फ्रांस की दैसो एविएशन को चुना. कुछ विमान तैयार हालत में भारत आने थे, जबकि बाकी विमान दैसो और एचएएल को भारत में ही तैयार करने थे. ये सौदा आगे नहीं बढ़ पाया. दैसो और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के बीच भी आपसी सहमति नहीं बन पायी क्योंकि एचएएल को राफेल बनाने के लिए दैसो तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा वक्त चाहिए था.
मोदी सरकार के सितंबर, 2016 की डील के मुताबिक, वायुसेना को 36 तैयार राफेल विमान मिलने हैं. डील के नियम-शर्तों के मुताबिक एक चौथाई रकम फ्रांस सरकार को चुकाई भी जा चुकी है. तय शेड्यूल यानी सितंबर 2019 तक राफेल विमान की डिलीवरी मिल जानी है.



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