प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2600 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी के आरोपी जूम डेवलपर्स के मालिक विजय एम चौधरी को बुधवार को इंदौर कोर्ट में पेश किया। विजय चौधरी पर 25 बैंकों से कुल 2650 करोड़ रुपए लोन फ्राॅड केस में शामिल होने का आरोप है। यह देश के सबसे बड़े बैंक फ्रॉड मामलों में से एक माना जा रहा है। ईडी प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत इस मामले की जांच कर रहा है।
ईडी के अनुसार जूम डेवलपर्स ने 25 बैंकों से कुल 2650 करोड़ रुपए के लोन लिए थे, जिसे चुकाया नहीं। इनमें ताजा मामला 966 करोड़ के लोन से जुड़ा है। जूम डेलवपर्स ने कथित तौर पर यह माना है कि वह कई कंपनियों का ग्रुप था और उन कंपनियों को भारतीय बैंकों के सामने स्वतंत्र संस्थाओं के तौर पर पेश किया गया था।
ईडी ने सीबीआई की एक FIR के आधार पर PMLA के तहत चौधरी पर आपराधिक मामला दर्ज किया था। सीबीआई चौधरी के खिलाफ 5 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जूम डेवलपर्स को इंदौर से ऑपरेट किया जाता है, इसलिए ईडी ने बुधवार को चौधरी को इंदौर कोर्ट में पेश किया।
चौधरी पर आरोप है कि उसने अपने और अपने सहयोगियों के नाम से 485 कंपनियां बना रखी थीं। एजेंसी की जांच में यह भी सामने आया है कि चौधरी ने 2 ट्रस्ट भी बना रखे थे, जिनके नाम बेवरिन स्टिफंग फाउंडेशन और विंडलीफ फाउंडेशन हैं। चौधरी इनका अकेला बेनिफिशियरी है। इन ट्रस्टों के जरिए यूके और स्विट्जरलैंड में भी 5 कंपनियां बनाई गई थीं।
ईडी जुलाई 2015 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में चौधरी की 130 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की 1280 एकड़ जमीन जब्त कर चुका है।
ईडी के अनुसार कथित तौर पर अपने व अपने सहयोगियों के नाम से 485 कंपनियां बनाने वाले चौधरी की 45 कंपनियां विदेशों में हैं। पूरी धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड चौधरी ही है।

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