वर्ष 2018 में उद्योग, व्यापार और बैंकिंग क्षेत्र में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिसकी गूंज और उसका प्रभाव लम्बे समय तक जनता और सरकार दोनों पर पड़ेगा. RBI के गवर्नर उर्जित पटेल का इस्तीफा और डायमंड कारोबारी नीरव मोदी द्वारा PNB का 13 हजार करोड़ रुपये के घोटाले से देश को उबरने में काफी समय लगेगा.
पंजाब नेशनल बैंक मुंबई की ब्रेडी हाउस ब्रांच ने 29 जनवरी को CBI से शिकायत की कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के चलते नीरव मोदी को 280 करोड़ रुपये का फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (LOU) जारी किया गया है. जांच में पता चला कि यह घोटाला (13700 करोड़ रुपये) बहुत बड़ा है.
भारतीय बैंकिंग इतिहास के इस सबसे बड़े घोटाले से PNB के शेयर की कीमत 45 फीसदी तक घट गई और जनवरी-मार्च तिमाही में बैंक को 13,417 करोड़ रुपये का घाटा हुआ.
TCS का मार्केट कैप अप्रैल 18 में बढ़कर सौ अरब डॉलर के पार पहुंच गया. यह देश की दूसरी कंपनी बनी जिसका मार्केट कैप 7 लाख करोड़ के पार निकला. इसके पूर्व अक्टूबर 2007 में रिलायंस का मार्केट कैप 7 लाख करोड़ के पार पहुंचा था.
मुकेश अंबानी की नेटवर्थ जुलाई महीने में 3.10 लाख करोड़ के पार पहुंच गई. जिससे वो चीन की कंपनी अलीबाबा ग्रुप के चेयरमैन जैक मा को पीछे छोड़कर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए.
चार अक्टूबर को मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 91.34 पैसे तक पहुंच गई थी. उसी महीने डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिरकर 74.39 पर पहुंच गई. हाँलाकि वर्ष समाप्त होने के समय यह साल के सबसे निचले रेट पर आ गयी.
दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी वॉलमार्ट ने भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी एक लाख करोड़ में खरीद लिया.
दस दिसंबर को RBI के तत्कालिन गवर्नर उर्जित पटेल ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनकी जगह पर शक्तिकांत दास को RBI का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है.
दस दिसंबर को इंग्लैंड की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने शराब कारोबारी विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी. माल्या पर भारतीय बैंकों के 9000 करोड़ रुपये बकाया हैं.



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