पाकिस्तान के ऐबटाबाद स्थित ऐतिहासिक कटासराज शिव मंदिर में पिछले 20 सालों से पूजा-अर्चना करना पूरी तरह से बैन था। मंगलवार 9 मई को पाकिस्तान की एक अदालत ने इस बैन को हटा दियाl
पाकिस्तान के ऐबटाबाद का ऐतिहासिक महत्व वाला कटासराज शिव मंदिर पूरी दुनिया में अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। संपत्ति विवाद की वजह से इस मंदिर में पिछले 20 सालों से पूजा-अर्चना करना पूरी तरह से बैन था।
पाकिस्तान के पेशावर स्थित हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अतीक हुसैन शाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को इस बैन को हटा दिया और हिंदू समुदाय के लोगों को संविधान की धारा 20 के तहत पूजा करने की परमीशन दे दी। अब इसमें कोई भी पूजा अर्चना कर सकता है।
एक पुराने संपत्ति विवाद की वजह से यहाँ बैन लगाया गया था। जिसके बाद से वहां किसी भी प्रकार की पूजा नहीं की जा रही थी। 2013 में एक गैर सरकारी संगठन ने पेशावर हाईकोर्ट की ऐबटाबाट पीठ के समक्ष दायर याचिका में कहा कि उन्होंने इस संपत्ति को कानूनी तौर पर इसके मालिक से खरीदा है।
ये मंदिर पाकिस्तानी पंजाब के उत्तरी भाग के नमक खोह पर्वत में स्थित हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ स्थान है। यहां शिव के प्रचीन मंदिरों के अलावा और भी कई मंदिर हैं। इतिहासकारों एवं पुरात्तववेत्ताओं के अनुसार इस स्थान को शिव का नेत्र माना जाता है। कहा जाता है कि जब मां पार्वती सती हुईं तो भगवान शिव की आंखों से दो आंसू टपके, एक आंसू कटास पर टपका जहां पर अमृत सरोवर बन गया तो दूसरा आंसू अजमेर राजस्थान में टपका जहां पुष्करतीर्थ बन गया।
ऐसी भी मान्यता है कि राजपाट को जुए में हारकर वन-वन भटक रहे पांडव (चार भाई) यहाँ पानी की तलाश करते हुए आए थे लेकिन यहाँ यक्ष का एकाधिकार था। उन्होंने शर्त रखी कि सवालों का सही जवाब देने पर ही वो इस पानी का सेवन कर सकेंगेl लेकिन ऐसा हो नहीं पाया और प्यास के कारण पांडव मूर्छित हो गए। आखिर में उन्हें खोजते हुए युधिष्ठिर पहुंचे और सभी सवालों का जवाब देने के बाद चारों भाइयों को पानी पिलाया।
इस कुंड का रंग एक समान नहीं है लिहाजा इसकी गहराई भी समानांतर नहीं है। जहां सरोवर का रंग हरा है वहां गहराई कम है और जहां पर पानी बहुत गहरा है वहां का पानी नीला है।

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