1.20 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन होगा कैंसल, हो चूका है 2.26 लाख का

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सरकार ने शेल कंपनियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखते हुए एलान किया कि नियमों का पालन नहीं किए जाने के कारण 1.20 लाख और कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसल किया जायेगा. सरकार पिछले वर्ष ही 2.26 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसल करते हुए इनसे जुड़े लगभग 3.09 लाख डायरेक्टर्स को डिसक्वालिफाई कर चुकी है.
सरकार ने 16 जनवरी को ब्लैकमनी की चुनौती से निपटने के लिए ‘शेल कंपनियों’ के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखते हुए पिछले हफ्ते डिरजिस्टर्ड कंपनियों के हुए एक्शन को लेकर हुई रिव्यू मीटिंग के बाद यह एलान किया. सरकार 2.26 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन पहले ही कैंसल कर चुकी थी और ऐसी कंपनियों से जुड़े लगभग 3.09 लाख डायरेक्टर्स को डिसक्वालिफाई किया जा चुका था.
रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता करने वाले स्टेट कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्टर पी. पी. चौधरी ने अधिकारियों को ऐसी कंपनियों के खिलाफ तेजी से एक्शन लेने के निर्देश दिए, जिनके रजिस्ट्रेशन कैंसिल किए जाने हैं. कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री ने कहा कि कई नॉन कंप्लायंस को लेकर 1.20 लाख से ज्यादा कंपनियों की पहचान की गई है, जिनके रजिस्ट्रेशन कैंसल किए जाने हैं. इकोनॉमी से अवैध फंड बाहर निकालने की कवायद के तहत 31 दिसंबर 2017 तक 2.26 लाख से ज्यादा कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसल किया गया था.
कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री ने कहा कि डिरजिस्ट्रेशन और डिसक्वालिफिकेशन की कार्रवाई के बाद कंप्लायंस बढ़ने का ट्रेंड देखने को मिल रहा है. साथ ही एमसीए21 पर एनुअल रिटर्न और स्टेटमेंट फाइल करने के लिए ज्यादा कंपनियां आगे आ रही हैं. डिरजिस्टर्ड कंपनियों की बहाली के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में 1,157 केस फाइल हुए हैं. NCLT ने इनमें से 180 कंपनियों की बहाली पर विचार का आदेश दिया था, जिनमें से 128 कंपनियों को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) ने बहाल कर दिया. जबकि डायरेक्टर्स के डिसक्वालिफिकेशन से जुड़े 992 मामलों में से लगभग 190 मामलों निपटाए गए हैं.

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