हिमाचल में जयराम ठाकुर PM की मौजूदगी में NDA के 19वें CM बने

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जयराम ठाकुर ने PM मोदी भी मौजूदगी में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शिमला के रिज मैदान में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने जयराम ठाकुर और उनके बाद 10 कैबिनेट मंत्रियों को पद की शपथ दिलवाई. मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने वालों में महेंद्र सिंह ठाकुर, सुरेश भारद्वाज, रामलाल मरकंडा, सरवीण चौधरी, राजीव सैजल, अनिल शर्मा, विपिन परमार, वीरेंद्र कंवर, विक्रम सिंह, गोविंद सिंह शामिल हैं.
शपथ से पहले ठाकुर ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि आज मेरे पिता होते तो बड़ी खुशी होती। उनका एक साल पहले निधन हो गया, मेरी माताजी भी अस्वस्थ्य हैं लेकिन उनका आशीर्वाद मेरे साथ है यही बड़ी बात है। हिमाचल और पार्टी के लोगों ने हममें विश्वास दिखाया है हम उस पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे।
शिमला के रिज मैदान पर शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए PM के अलावे केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, नितिन गडकरी, अंनत कुमार गीते, थावर चंद गहलोत, जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री व उप-मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के विभिन्न भागों से आये करीब 50 हजार लोग पहुंचे थे.
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जयराम ठाकुर का जन्म 6 जनवरी 1965 में मंडी जिला के थुनाग में गरीब परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम स्व. जेठू राम व माता का नाम बृक्मू देवी है. उनकी प्रारांभिक शिक्षा प्राथमिक पाठशाला कुराणी व माध्यमिक शिक्षा थुनाग से हुई थी. माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद बड़स्याड़ हाईस्कूल से दसवीं कक्षा की शिक्षा ग्रहण करने के लिए उन्हें स्कूल आने- जाने के लिए रोजाना 14 किमी का फासला पैदल तय करना पड़ता था.
वर्ष 1980-81 में वह आर्थिक तंगी के कारण एक साल तक अपने गांव में ही रहे और खेतीबाड़ी में अपने माता-पिता का हाथ बंटाते रहे. उसके बाद उन्होंने मंडी के बल्भ सांध्य कॉलेज में यह सोचकर दाखिला लिया कि वह दिन में कोई रोजगार हासिल कर पढ़ाई पूरी कर लेंगे, लेकिन उन्हें रोजगार नाम मात्र का ही मिला. इसी दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए और मंडी के राजकीय महाविद्यालय में रेगुलर तौर पर बीए की शिक्षा ग्रहण करने के बाद वह जम्मू में एबीवीपी के होल टाइमर कार्यकर्ता बनकर गए.
90 के दशक में उन्हें मंडी के सिराज विधानसभा क्षेत्र युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया. 1993 में वह युवा मोर्चा के जिलाअध्यक्ष बने. उन्होंने सबसे पहले मंडी जिले के सिराज विधानसभा क्षेत्र से 1998 में चुनाव लड़ा और इस बार वहीं से पांचवी बार विधायक चुने गए हैं.
हिमाचल प्रदेश विधानसभा की 68 सीटों में से भाजपा को 44 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस 21 और तीन सीटें अन्य को मिली हैं. भाजपा को करीब 48.6 फीसदी और कांग्रेस को 41.9 फीसदी वोट प्राप्त हुए हैं.

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