शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रामलला का दर्शन करने के बाद कहा कि कल से मैं अयोध्या में हूं. मेरी अयोध्या यात्रा सफल रही. संतों से मैंने कहा कि जो कार्य हम करने जा रहे हैं, वो आपके सहयोग के बिना पूरा नहीं हो सकता. पूरा देश इंतजार कर रहा कि राम मंदिर कब बनेगा. हम कब तक इंतजार करेंगे.
ठाकरे ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि योगी जी कहते हैं कि वहां मंदिर था, है और रहेगा. लेकिन हमारी ये धारणा है कि मंदिर दिखना चाहिए, वो जल्द से जल्द पूरा होना चाहिए. उसके लिए कानून बनाएं या अध्यादेश लाएं, कुछ भी करिए, लेकिन मंदिर जल्द बनाइए. शिवसेना साथ देने को कह रही है. आज की सरकार ताकतवर है, अगर ये सरकार मंदिर नहीं बनाएगी तो कौन बनाएगा. अगर ये सरकार मंदिर नहीं बनाएगी तो मंदिर तो बनेगा लेकिन फिर ये सरकार नहीं बनेगी.
उद्धव ने कहा कि हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. अटल जी ने कहा था कि हिंदू मार नहीं खाएगा. वो दिन चले गए, अब हिंदू ताकतवर हो गया है. अब हिंदू मार तो नहीं ही खाएगा, चुप भी नहीं बैठेगा अब. रामलला के दर्शन के लिए जाते वक्त मुझे लगा कि मैं रामलला के दर्शन के लिए मंदिर जा रहा हूँ या जेल जा रहा हूँ. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा ने कहा था कि मंदिर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. आप सिर्फ चुनाव से पहले ये बात करते हैं. अगर मामला कोर्ट में होने की बात कर रहे तो लोगों से साफ कह दें कि मंदिर भी सिर्फ चुनावी जुमला था. आप लोगों से कह दें कि आपसे ये नहीं हो पाएगा. हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ न करें. मंदिर बनाने के लिए कुछ भी करिए.


शनिवार को अपने परिवार के साथ अयोध्या पहुंचे ठाकरे ने सरयू तट पर आरती की तथा साधू संतों और महाराष्ट्र से हजारों की संख्या में आए शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए कहा था कि वे यहां सिर्फ आशीर्वाद लेने आए हैं और अब आते रहेंगे. उन्होंने कहा कि मैं यहां राजनीति करने नहीं आया बल्कि कुंभकर्ण बनी BJP को जगाने आया हूं. कुंभकर्ण छह महीने सोता था, लेकिन BJP चार साल से सो रही है. मैं चाहता हूं कि सब मिलकर मंदिर बनाए.
ज्ञात है कि 80 के दशक में जब संघ परिवार राम मंदिर निर्माण का आंदोलन चला रहे थे, तब शिवसेना के तत्कालीन प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने हिंदुओं के मुद्दे को भाजपा से कहीं अधिक आक्रामकता से उठाया था. उसके कारण महाराष्ट्र में शिवसेना को भाजपा से ज्यादा फायदा हुआ और वहाँ शिवसेना भाजपा का बड़ा भाई बनकर उभरी. उद्धव की दो दिवसीय अयोध्या यात्रा इसी इतिहास को दोहराने जैसा लगता है. क्योंकि शिवसेना अब सिर्फ मराठी भाषियों पर निर्भर नहीं रह सकती है. गैर मराठी वोटरों तक पहुंच बनाने के लिए उसके पास राम मंदिर ही ऐसा मुद्दा है जो उत्तर भारतीयों और गुजराती वोटरों से जुड़ने में उसकी मदद कर सकता है क्योंकि मुंबई-ठाणे क्षेत्र में उत्तर भारतीय और गुजराती वोटर सर्वाधिक हैं.



loading…

Loading…






Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *