हम हिन्दुस्तानियों को कोई डॉलर या रेयाल से नहीं खरीद सकता

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इस्लाम धर्म में दहेज़ लेना और देना दोनों हराम क़रार दिया गया है. आज समाज में बेटी को अच्छी निगाहों से नहीं देखा जाता, इस सोच को बदलना आवश्यक है तभी समाज तरक्की कर सकता है.
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दहेज मुक्त समाज का सन्देश प्रदेश के गाँव- गाँव तक पहुंचने लगा है. जिसकी मिसाल देखने को मिली औरंगाबाद जिले के सुदूर गाँव शेखपुरा में. झारखंड से सटे नबीनगर प्रखंड के टंडवा पंचायत इस गाँव के निवासी गुलाम साबिर ने झारखण्ड के गढवा में दहेज मुक्त शादी किया.
शादी के बाद शेखपुरा में एक आलीशान जलसा का प्रोग्राम रखा गया. जिसमे हिन्दुस्तान के मशहूर शायर हाजी रफीउल क़ादरी, मौलाना जमील, मौलाना जुनेद, मोईनुद्दीन चतुर्वेदी, फ़ैयाज़ आलम, इम्तेयाज व् नवाज़, रहबर, मोबिन मैक्स, नदीम, शेर मोहम्मद, अब्दुल हमीद, आरिफ वक़ार, जैयाउल रसूल, गुलाम क़ादिर जैसे अनेकों मौलानाओं ने शिरकत किया.


इन मौलानाओं ने राष्ट्रिय, सामाजिक, राजनैतिक एवं धार्मिक मुद्दों पर प्रस्तुत अपने नज्मों से लोगों को अच्छी सोच के साथ परिवार, समाज और देश को तरक्की के राह पर आगे बढ़ाने की सिख दी.
सुन्नते मुस्तफा कांफ्रेंस बा मौका शादी मुबारक के इस खुशनुमा मौके पर “हम वे हिन्दुस्तानी हैं जिसे कोई डॉलर या रेयाल से खरीद नही सकता”, “मज़हब नही सिखाता आपस में वैर रखना और “कुर्सी पर कोई बैठे राजा तो मेरे ख्वाजा हैं” आदि नगमों ने रात भर लोगों को बंधे रखा. जलसे में समाज के हर वर्ग ने हिस्सा लिया.
हाफिज गुलाम साबिर रज़ा ने इस अवसर पर कहा की यह प्रोग्राम संदेश दे रहा है कि दहेज़ लेना और देना दोनों इस्लाम धर्म में हराम है. बेटी को अच्छी निगाहों से देखें, दहेज़ ना लें और आपस में मिल्लत से रहें जैसी छोटी-बड़ी बातों को लोगो तक पहुचाने के लिए इस प्रोग्राम को किया गया. जलसे में जेयाउल रसूल औरंगाबादी ने थ्रीडी के माध्यम से नये अंदाज में नाथ शरीफ़ पढ़कर लोगो को बाग़-बाग़ कर दिया. यंहा पहुचे हजारों श्रोता रात भर आनन्द लेते रहे.

(टंडवा से फकरुदीन की रिपोर्ट)



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