हमें मिलकर शांति, शिक्षा, सुरक्षा, समृद्धि और संस्कारों की रक्षा करनी है : मोदी

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भारत और नेपाल आज दो देश हैं, लेकिन हमारी मित्रता त्रेता युग की है. राजा जनक और राजा दशरथ ने सिर्फ जनकपुर और अयोध्या ही नहीं, भारत और नेपाल को भी मित्रता और साझेदारी के बंधन में बांध दिया था. ये बंधन राम-सीता, बुद्ध और महावीर का है. यही बंधन रामेश्वरम में रहने वालों को खींच कर पशुपतिनाथ और लुम्बिनी में रहने वालों को बोधगया ले जाता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों की नेपाल यात्रा पर बारहबीघा ग्राउंड में नेपाल की जनता को संबोधित करते हुए उक्त बातें कहीं. जनकपुर पहुंचने पर एयरपोर्ट PM का भव्य स्वागत किया गया, गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया. यहां से सीधे जानकी मंदिर गए जहां पूजा-अर्चना के बाद रामायण सर्किट और जनकपुर-अयोध्या बस सेवा को हरी झंडी दिखाई. पिछले चार सालों में PM मोदी का यह तीसरा नेपाल दौरा है जिसमें दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर होगा.
PM ने आगे कहा कि यही बंधन, यही आस्था, यही स्नेह, आज मुझे जनकपुर ले आया है. भारत नेपाल संबंध किसी परिभाषा से नहीं बल्कि आस्था की भाषा से बंधे हैं. ये भाषा अपनेपन और रोटी- बेटी की है. ये मां जानकी का धाम है, जिनके बिना अयोध्या अधूरी है. इतिहास साक्षी है, जब-जब एक-दूसरे पर संकट आए दोनों मिलकर खड़े हुए हैं. हमने हर मुश्किल घड़ी में एक दूसरे का साथ दिया है.
मोदी ने कहा कि ये समय हमें मिलकर शांति, शिक्षा, सुरक्षा,समृद्धि और संस्कारों के पंचवटी की रक्षा करने का है. हमारा मानना है कि नेपाल के विकास में ही क्षेत्रीय विकास का सूत्र है. विकास की पहली शर्त होती है लोकतंत्र और मुझे खुशी है कि लोकतांत्रिक प्रणाली को आप मजबूती दे रहे हैं. लोकतांत्रिक मूल्य एक और कड़ी है जो भारत और नेपाल के प्राचीन संबंधों को मजबूती देती है. भारत ने भी इस शक्ति को महसूस किया है और आज भारत का हर नागरिक अपने सपनों को पूरा करने में जुटा है.


मोदी ने कहा कि जनक की नगरी, सीता माता के कारण स्त्री- चेतना की गंगोत्री बनी है. सीता माता यानि त्याग, तपस्या, समर्पण और संघर्ष की मूर्ति. ये वो धरती है जिसने दिखाया कि बेटी को किस प्रकार सम्मान दिया जाता है. यहां की मिथिला चित्रकारी परंपरा को आगे बढ़ाने में अत्यधिक योगदान महिलाओं का ही रहा है, जो आज पूरे विश्व में प्रसिद्द हैं. राजा जनक और जनकल्याण के इस संदेश को लेकर ही हम आगे बढ़ रहे हैं.
मोदी ने कहा कि नेपाल और भारत के संबंध राजनीति, कूटनीति, समरनीति से परे देव-नीति से बंधे हैं. व्यक्ति और सरकारें आती-जाती रहेंगी, पर ये संबंध अजर, अमर हैं. हाल में ही नेपाल के प्रधानमंत्री ओली जी का स्वागत दिल्ली में करने का अवसर मुझे मिला था. नेपाल को लेकर उनका विजन क्या है, ये जानने को मिला, ओली जी “समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाली” की बात करते हैं. नेपाल की समृद्धि और खुशहाली की कामना भारत हमेशा से करता आया है. प्रधानमंत्री ओली को भी उनके इस विजन को पूरा करने के लिए मैं शुभकामनाएं देता हूं.
PM ने कहा कि जब मैं ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करता हूं, तो सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, सभी पड़ोसी देशों के लिए भी मेरी यही कामना होती है और जब नेपाल में ‘समृद्द नेपाल, सुखी नेपाली’ की बात होती है, तो मेरा मन भी हर्षित होता है, सवा सौ करोड़ भारतवासियों को भी खुशी होती है.
इसके पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने जनकपुर-अयोध्या के बीच बस सेवा को हरी झंडी दिखाने के मौक़े पर कहा कि रामायण सर्किट भारत और नेपाल दोनों के लिए अहम है. इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि एकादशी के दिन जनकपुर में मां जानकी के चरणों में आना मेरा सौभाग्य है. हम नेपाल के साथ रिश्तों को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. भारत और नेपाल दोनों देशों के बीच ‘रामायण’ सर्किट बनाने की दिशा में काम करेंगे. यह दोनों देशों के बीच लोगों से संपर्क करने के लिए मजबूत लोगों के लिए आधार के रूप में कार्य करेगा. इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने पीएम का अभिवादन किया. मंदिर परिसर में मोदी-मोदी के नारे भी लगे.

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