स्वच्छता सर्वेक्षण- 2019 जारी हो गया. अरबों रूपये खर्चने के बाद भी बिहार के निकायों की स्थिति में सुधार देखने को नहीं मिल रहा. निकायों के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व कर्मियों के अपने- अपने तर्क हैं पर जनभागीदारी के अभाव एवं बिहारीपन के अक्खड़ स्वभाव का परिणाम है कि जारी रिपोर्ट में प्रदेश का कोई भी निकाय टाप 250 में स्थान नहीं बना पाया है.
बिहार में मुंगेर को सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव मिला है, जिसे 271वीं रैंकिंग मिली है और जमालपुर 280वाँ रैंक प्राप्त कर पाए हैं. प्रदेश में किशनगंज को 305वाँ, औरंगाबाद ने 307वाँ रैंक प्राप्त कर प्रदेश की राजधानी पटना (318वाँ रैंक) से ज्यादा स्वच्छ रहने का गौरव हासिल किया है. जबकि कटिहार 359, मोतिहारी 380, बेतिया 387, मुजफ्फरपुर को 391, बिहारशरीफ 393, सीवान 394, डेहरी- डालमियानगर 395 और हाजीपुर ने 400वाँ रैंक पाया. गया को 401वाँ, जहानाबाद 402, दरभंगा 407, बगहा 408, सासाराम 411, भागलपुर 412, बक्सर 416, आरा 417, बेगूसराय 419, पूर्णिया 420, दानापुर 422, छपरा 424 और सहरसा को 425वीं रैंकिंग मिली है.
बिहार के निकायों की सबसे बड़ी विफलता कचरा प्रसंस्करण और निस्तारण के क्षेत्र में रही है. खुले में पेशाब करने और कचरा फेंकने के अलावे ODF करने में भी बिहार फिसड्डी साबित हुआ है. स्वच्छता एप के माध्यम से शिकायत निवारण, ई-लर्निंग, कचरा स्थल को सुंदर बनाने तथा अपनी डिलेवरी को सुधरने में भी प्रदेश विफल रहा है. निकाय अपने कागजात को सही ढ़ंग से प्रस्तुत भी नहीं कर पाये. बिहार की स्थिति कितनी दयनीय रही इसका एक प्रमाण पर्याप्त है कि निर्धारित पांच हजार अंकों में से कोई भी निकाय दो हजार अंक भी प्राप्त नहीं कर पाए.
देश में पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्यों के शहर सर्वे में शामिल हुए थे. स्वच्छता सर्वेक्षण 4237 शहरों की 40 करोड़ शहरी आबादी पर करने के दौरान 67 लाख लोगों से सवाल- जवाब हुए. वर्ष 2018 के सर्वे में 4041 शहर शामिल किए गये थे. इसबार लगातार तीसरी बार मध्यप्रदेश के इंदौर ने सबसे स्वचछ शहर का प्रथम पुरस्कार पाया. भोपाल को देश की सबसे स्वच्छ राजधानी श्रेणी का प्रथम पुरस्कार और उज्जैन को 3 से 10 लाख की आबादी वाले शहर की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार मिला. नई दिल्ली म्युनिसपल काउंसिल को सबसे स्वच्छ स्मॉल सिटी, गोचर, उत्तराखंड को गंगा तट पर सर्वश्रेष्ठ कस्बा, अहमदाबाद को सबसे स्वच्छ बड़े शहर और सबसे तेज विकसित होते शहर का प्रथम पुरस्कार रायपुर को प्राप्त हुआ.


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