सोलिह को मालदीव के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने पर PM मोदी ने दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के माले स्थित नेशनल स्टेडियम में आयोजित शपथग्रहण समारोह में भाग लिया और समारोह के बाद भारतीय PM ने सोलिह को बधाई दिया, इसके बाद दोनों नेता गले मिले.
PM मोदी ने ट्वीट किया कि- “मालदीव के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के लिए इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को बधाई. मैं उनके बेहतरीन कार्यकाल के लिए बधाई देता हूं. मैं दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के लिए सोलिह के साथ काम करने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं.”
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के चुनाव में सोलिह को उनकी जीत के लिए बधाई देते हुए उनके कार्यकाल को सर्वोत्तम रहने की कामना की, यात्रा से पहले मोदी ने ट्वीट कर कहा कि- ‘मैं सोलिह की नई मालदीव सरकार को उनकी विकास प्राथमिकताओं विशेषकर आधारभूत क्षेत्र, स्वास्थ्य देखभाल, सम्पर्क एवं मानव संसाधन विकास को साकार करने के लिए मिलकर काम करने की भारत सरकार की मंशा से अवगत कराऊंगा.’ “मालदीव में हुए हालिया चुनाव लोकतंत्र, कानून का शासन एवं समृद्ध भविष्य के लिए लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं.” “हम एक स्थिर, लोकतांत्रिक, समृद्ध और शांतिपूर्ण मालदीव गणतंत्र देखना चाहते हैं.”
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की मालदीव की यह पहली यात्रा है. ज्ञात है कि दक्षिण एशियाई देशों में मालदीव एकमात्र ऐसा देश है, जहां की यात्रा नरेंद्र मोदी ने 2014 में PM बनने के बाद नहीं की थी. हाँलाकि 2015 में मोदी मालदीव की यात्रा करने वाले थे, लेकिन वहां सरकार विरोधी प्रदर्शनों और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशिद की गिरफ्तारी के कारण उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी.


मालदीव में सितंबर 2018 में हुए आम चुनाव में मालदिवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के गठबंधन ने 58 प्रतिशत वोट प्राप्त कर तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को हरा दिया था. 1994 में पहली बार संसद पहुंचे इब्राहीम मोहम्मद सोलिह की मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी बनाने में अहम भूमिका रही है. 2003 से लेकर 2008 के बीच उन्होंने देश में राजनीतिक सुधारों के लिए आंदोलन चलाया था. इन्हीं के प्रयासों से देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान को मजबूती मिल सकी है. वो साल 2011 से MDP संसदीय समूह के नेता हैं. इब्राहीम सोलिह भारत के साथ मजबूत संबंधों के हिमायती रहे हैं. उन्होंने हमेशा से भारत से अच्छे राजनीति और व्यापारिक रिश्तों की पैरवी की है. इब्राहिम सोलिह ने खुद इच्छा व्यक्त की थी कि उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत के PM मोदी मौजूद रहें.
हालांकि निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन का झुकाव चीन की ओर था. उनके कार्यकाल के दौरान यामीन ने भारतीय कंपनियों के ठेके रद्द कर दिये थे. यहां तक कि बचाव अभियान में लगे दो भारतीय हेलिकॉप्टर को भी वापस भेज दिया था. मालदीव में 45 दिनों तक लगी इमरजेंसी के दौरान भारतीय कामगारों के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया गया था.
चुनाव से पहले भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया था कि- “मालदीव के चुनाव में अगर धांधली होती है तो भारत को मालदीव पर हमला कर देना चाहिए.” इसके बाद भारत के साथ मालदीव के रिश्ते और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए थे और मालदीव ने भारत के उच्चायुक्त अखिलेश मिश्र को सम्मन तक कर दिया था. इसीबीच चीन ने यहां पैर पसारने शुरू कर दिए थे. चीन की कंपनियों ने अब्दुल्ला यामीन से सड़क निर्माण के कई प्रोजेक्ट हासिल किए. साथ ही पिछले दिसंबर में दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने के लिए मुक्त व्यापार समझौता भी साइन किया गया था.

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