सोलर एनर्जी वाली देश की पहली डेमू लॉन्च, सालाना 21000 लीटर डीजल बचेगा

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रेलवे ने सोलर पॉवर सिस्टम से लैस देश की पहली ट्रेन लॉन्च की, रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने शुक्रवार को स्पेशल डीजल-इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेन को दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन पर हरी झंडी दिखाई।
इस DEMU में कुल 10 कोच (8 पैसेंजर और 2 मोटर) हैं, जिसके 8 कोच की छतों पर 16 सोलर पैनल लगे हैं, सूरज की रोशनी में इनसे 300 वॉट बिजली बनेगी और कोच में लगा बैटरी बैंक चार्ज होगा। बाद में ट्रेन की सभी लाइट, पंखे और इन्फॉर्मेशन इसी से चलेगा। ट्रेन के एक कोच में 89 लोग सफर कर सकते हैं। यह ट्रेन हर साल 21 हजार लीटर डीजल की बचत करेगी।
सुरेश प्रभु ने इस अवसर पर कहा कि इंडियन रेलवे को इन्वायरमेंट फ्रेंडली बनाने के लिए ये एक लंबी छलांग है। हम एनर्जी के गैर-परंपरागत तरीकों को बढ़ावा दे रहे हैं। आमतौर पर DEMU ट्रेन मल्टीपल यूनिट ट्रेन होती है, जिसे इंजन से जरिए बिजली मिलती है। इसके लिए इंजन में अलग से डीजल जनरेटर लगाना पड़ता है, लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं होगी।
सुरेश प्रभु ने शुक्रवार को इंटीग्रेटेड मोबाइल ऐप (रेल सारथी) लॉन्च करते हुए कहा कि इसमें पैसेंजर्स को टिकट बुकिंग, पूछताछ, कोच की साफ-सफाई, खाने के ऑर्डर जैसी फैसिलिटी एक साथ मिलेंगी। साथ ही इसमें महिलाओं की सेफ्टी के लिए खास ऑप्शन भी मौजूद है। रेल सारथी ऐप से एयर टिकट भी बुक किए जा सकते हैं। हम इसके फीडबैक का इंतजार करेंगे। फिलहाल रेलवे की सर्विस के लिए यूजर्स को अलग-अलग ऐप डाउनलोड करने पड़ते हैं।


रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार आज लॉन्च हुई DEMU ट्रेन दिल्ली डिवीजन के सबअरबन में चलेगी। इसके लिए जल्द ही रूट और किराया तय होगा। 1600 हॉर्स पॉवर ताकत वाली यह ट्रेन चेन्नई की कोच फैफ्ट्री में तैयार की गई है। जबकि इंडियन रेलवेज ऑर्गेनाइजेशन ऑफ अल्टरनेटिव फ्यूल (IROAF) ने इसके लिए सोलर पैनल तैयार किए और इन्हें कोच की छतों पर लगाया। अगले 6 महीने में ऐसे 24 कोच और तैयार हो जाएंगे। कोच में लगे सोलर सिस्टम की लाइफ 25 साल है। ट्रेन को तैयार करने में 13.54 करोड़ का खर्च आया है, यानी एक पैसेंजर कोच की लागत करीब 1 करोड़ रुपए आई।
सोलर एनर्जी के अलावा इसके सभी कोच में बायोटॉयलेट, वॉटर रिसाइकिलिंग, वेस्ट डिस्पोजल, बायो फ्यूल (CNG और LNG) और विंड एनर्जी के इस्तेमाल का भी इंतजाम है। सोलर पॉवर सिस्टम को मजबूती देने के लिए इसमें स्मार्ट इन्वर्टर लगे हैं, जो ज्यादा बिजली पैदा करने में मददगार साबित होंगे। साथी ही इसका बैटरी बैंक रात के वक्त कोच का पूरा इलेक्ट्रीसिटी लोड उठा सकेगा।
इस DEMU ट्रेन को अब इलेक्ट्रिसिटी के लिए अलग से जनरेटर की जरूरत नहीं होगी। डीजल की खपत कम होने से कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा। सोलर एनर्जी के जरिए हर साल एक कोच से निकलने वाली 9 टन कार्बन डाई ऑक्साइड को रोका जा सकता है। हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें

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