सेना में एक साथ कैप्टन बने भाई-बहन, 15 अगस्त को अब पूरा गांव मनाएगा खुशियां

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हरियाणा के खांडा खेड़ी गांव के फौजी रामफल ने सोचा था कि उसकी संतान बड़ी होकर फौज में भर्ती हो देश की सेवा करे। फौजी का सपना साकार हुआ और उसका बड़ा बेटा व बेटी सीधे कैप्टन के पद पर विराजमान हुए।
लड़की के कैप्टन बनने से पूरे गांव में खुशी का माहौल बना हुआ है और सरकार की बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ मुहिम को ओर भी ज्यादा मजबूती मिली है। फौजी पिता बेसब्री से इस दिन का इंतजार कर रहा था जिसदिन उसकी संतान फौज में उससे भी बड़े पद पर तैनात हो। अब गांव की कैप्टन बेटी 15 अगस्त को गांव में तिरंगा झंडा लहराएगी।

खांडा खेड़ी निवासी एवं फौज से रिटायर्ड रामफल ने बताया कि वो 1975 में फौज में राजपूताना रेजिमेंट (राजरी) में भर्ती हुए थे और सन 1995 में सुबेदार के पद से सेवानिवृत हुए थे। देश सेवा के दौरान किसी बड़े अफसर को देखते तो वो मन ही मन में सोचते कि वो अपनी संतान को भी फौज में ही भर्ती करवाएगा और एक बड़ा अफसर बनाएगा। 1982 में उनकी दुर्गा देवी से शादी हुयी और घर में चार बच्चों दो लड़कियां पूनम व गायत्री और लड़के प्रदीप व कुलबीर ने जन्म लिया। उन्होंने अपने चारों बच्चों को शिक्षित किया और देश सेवा के संस्कार दिए, ताकि वो भी फौज में भर्ती होकर देश सेवा कर सकें। उन की मेहनत रंग लाई, उनकी बेटी गायत्री ने जींद के डीएवी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की और दिल्ली के सफरदंगज अस्पताल से एमबीबीएस की शिक्षा ग्रहण की।
हिसार में हुई आर्मी की भर्ती के दौरान उसकी बेटी गायत्री का चयन सेना अस्पताल हिसार में कैप्टन के रूप में हुआ है, जबकि उनके बेटे प्रदीप का चयन नेवी में कैप्टन के पद पर हुआ। जो आजकल मुंबई में कैप्टन की ट्रेनिंग ले रहा है। उन दोनों की इस उपलब्धि से वो बहुत खुश हैं। कैप्टन बेटी व कैप्टन बेटे के गांव में पहुंचने पर ग्रामीण भी कार्यक्रम कर उनको सम्मानित करने के लिए उत्सुक हैं, ताकि गांव की अन्य लड़कियां व युवा उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ सकें।
कैप्टन गायत्री के अनुसार बचपन में उसके पिता ने उनके लिए एक सपना संजोया था और अपने पिता के सपने को उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया, कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आखिरकार उनके पिता का सपना और उनकी मेहनत रंग लाई और वो कैप्टन के पद पर हैं। मेरे कैप्टन बनने से ग्रामीण अंचल की लड़कियों को एक नई दिशा मिलेगी।

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