विदेश मंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने साफ कर दिया कि अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. चुनाव न लड़ने के पीछे उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. सुषमा स्वराज ने वियतनाम में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया है. डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी है कि वह धूल और अन्य एलर्जिक चीजों से बचें. हालांकि उन्होंने स्पष्ट कि चुनाव नहीं लड़ने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह राजनीति से संन्यास ले रही हैं. उन्होंने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद वह एकदम फिट हैं.

दो दिन पहले इंदौर में उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा था कि वह अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहतीं, उन्होंने तब भी स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था. सुषमा ने कहा था कि ‘पार्टी को इस पर फैसला लेना है लेकिन मैंने अगला चुनाव न लड़ने का मन बना लिया है.’
66 साल की सुषमा स्वराज का 2016 में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था. तब से चर्चा जोरों पर थी कि सुषमा अब शायद ही अगला चुनाव लड़ें लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था. सुषमा ने कहा, ‘डॉक्टरों ने मुझे धूलकणों से बचने की सलाह दी है इसलिए मैं चुनावी रैलियों में भाग नहीं ले सकती.’
सुषमा स्वराज की यह खबर फैलते ही सियासी हलकों में सुर्खियां तेज हो गईं क्योंकि बीजेपी की वरिष्ठतम नेताओं में उनका नाम शुमार है. बीजेपी ने उनके इस फैसले पर औपचारिक रूप से कुछ तो नहीं कहा लेकिन ‘इंडिया टुडे’ को सूत्रों ने बताया कि पार्टी चाहती है कि वो आगे भी चुनाव लड़ें और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं.
सुषमा स्वराज 1977 में महज 25 साल की उम्र में हरियाणा की कैबिनेट मंत्री बनी थीं. उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. विदिषा की सांसद सुषमा स्वराज 7 बार लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं. इसके साथ ही भारत के इतिहास में वो दूसरी महिला हैं जिन्हें विदेश मंत्री का पद मिला. उनसे पहले इंदिरा गांधी कार्यवाहक विदेश मंत्री थीं.

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