सुप्रीम कोर्ट में कुछ महीनों से सब ठीक नहीं चल रहा, SC के 4 सीनियर जज

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इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जज ने एक साथ मीडिया के सामने आकर कहा कि SC का एडमिनिस्ट्रेशन ठीक से काम नहीं कर रहा है और चीफ जस्टिस सुनवाई के लिए ज्युडिशियल बेंचों को केस मनमाने ढंग से दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इससे ज्युडिशियरी के भरोसे पर दाग लग रहा है, इंस्टीट्यूशन को ठीक नहीं किया गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ मीडिया के समक्ष आये थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद CJI ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को मीटिंग के लिए बुलाया।
चारों जजों ने CJI को भेजे 7 पेज के लेटर को मीडिया को दिया, जिसमें लिखा है कि CJI तय करते हैं कि किन मामलों में कौन से जज या बेंच में सुनवाई होगी। कोर्ट का काम अनुशासित और प्रभावी ढंग से हो, इसलिए CJI को रोस्टर तय करने की यह परंपरा है। न्याय व्यवस्था में ये स्थापित है कि CJI सभी बराबर के साथियों में प्रथम हैं, ना उनसे ऊपर और ना ही उनसे नीचे।
देश और ज्युडिशियरी पर दूरगामी असर के कई उदाहरण हैं, चीफ जस्टिसेज ने कई केसों को बिना किसी तार्किक आधार के ‘अपनी पसंद’ के हिसाब से बेंचों को सौंपा है। ऐसे मनमाने ढंग से काम करने से सुप्रीम कोर्ट की इमेज कुछ हद तक धूमिल हुई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जस्टिस जे चेलमेश्वर ने कहा कि हम चारों मीडिया का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। किसी भी देश के कानून के इतिहास में यह बहुत बड़ा दिन है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, क्योंकि हमें यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए की, ताकि कोई ये न कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी है। बीते कुछ महीनों में सुप्रीम कोर्ट में बहुत कुछ ऐसा हुआ, जो नहीं होना चाहिए था। हम आपसे इसलिए बात कर रहे हैं, क्योंकि हम देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी से नहीं भागना चाहते।
अभी SC में स्वीकृत 31 पदों में मात्र 25 जज कार्यरत हैं। जस्टिस जे चेलमेश्वर जून में रिटायर होने वाले हैं। CJI जस्टिस दीपक मिश्रा का कार्यकाल दो अक्टूबर 2018 तक है, जिसके बाद जस्टिस रंजन गोगोई अगले CJI होंगे।
जस्टिस जे चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट में दूसरे नंबर के सबसे सीनियर जज हैं। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एडीशनल जज और 2007 में गुवाहाटी और बाद में केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तथा अक्टूबर 2011 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में 2012 से कार्यरत जस्टिस रंजन गोगोई ने पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तथा गुवाहाटी हाईकोर्ट में जज रह चुके हैं।
एक अधिवक्ता के रूप में कैरियर शुरू करने वाले जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने 1977 से दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत की है। फरवरी 2010 से मई तक दिल्ली हाईकोर्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस रहने के बाद जून में गुवाहाटी हाईकोर्ट और बाद में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने।
जस्टिस कुरियन जोसफ ने 1979 से अपना कैरियर अधिवक्ता के रूप में शुरू किया। 2000 में केरल हाईकोर्ट के जज 2010 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तथा 8 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
इस मामले में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज आपस के मतभेद सुलझा लेंगे। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस को टाला जा सकता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज बहुत अनुभवी और जानकारी वाले हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि कल तक पूरा मामला सुलझ जाएगा। उधर प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को मीटिंग के लिए बुलाया।
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप करने की संभावना बहुत कम है. उसका मानना है कि अप्रत्याशित संवाददाता सम्मेलन में जो मुद्दे उठाए गये हैं, वे न्यायपालिका का ‘‘आंतरिक’’ मामला हैं. सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहती. हालांकि सूत्रों ने यह माना कि शीर्ष अदालत को इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहिए, क्योंकि लोगों का न्यायपालिका में भरोसा दांव पर है.

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