बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सिन्हो आयोग की सिफारिश के बावजूद राजनीतिक नुकसान के डर से रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल देने तथा जातीय नफरत को राजनीति का आधार बनाने वालों पर ट्विट के माध्यम से जबरदस्त हमला किया है.
मोदी ने ट्वीट किया कि- एस आर सिन्हो आयोग ने गरीब सवर्णों को 10 फीसद आरक्षण देने की सिफारिश 22 जुलाई 2010 को की थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजनीतिक नुकसान के डर से रिपोर्ट पर मौन साधते हुए इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया, जबकि उनकी UPA सरकार के कार्यकाल के चार साल बचे थे. अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने वाली रिपोर्ट लागू करने का फैसला लागू करने के लिए लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश कर दिया, तब इसका समर्थन न करने वालों को जनता की अदालत में जवाब देना होगा.
उन्होंने एक अन्य ट्वीट किया कि- ऊंची जाति के गरीबों को आर्थिक आधार पर सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने वाले विधेयक में पिछड़ेपन का पैमाना वही रखा गया है, जो ओबीसी समाज के लोगों के लिए लागू है. सरकार दलितों-पिछड़ों के हितों को कोई नुकसान पहुंचाये बिना गरीब सवर्णों का कल्याण करना चाहती है, इसीलिए संविधान संशोधन बिल लायी. जिन लोगों ने भूराबाल साफ करो जैसी गहरी जातीय नफरत को राजनीति का आधार बनाया, उन्हें समाज से नफरत और गैरबराबरी मिटाने वाला बिल चुनावी स्टंट लग रहा है.



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