भारत जल्द ही सिंधु जल समझौते के तहत पश्चिमी नदियों के पानी में अपने पूरे हिस्से का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। भारत नहीं चाहता की पानी का इस्तेमाल ऐसा देश करे जो हमेशा दुश्मनी की ताक में रहता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उरी आतंकी हमले के बाद कहा था कि पाकिस्तान के नापाक हथकंडों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत हर संभव प्रयास करेगा। हम खून और पानी एक साथ नहीं बहने देंगे। इसके बाद से इस मुद्दे पर कईं बैठके हुई। जिसमें ये फैसला लिया गया है कि पाकिस्तान को कम पानी दिया जाएगा।

भारत पाकिस्तान के रिश्तों और ताजा हालातों को देखते हुए लगता है कि ये संधि भारत जल्द ही तोड़ देगा। इसमें किसी को कोई हैरानी भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि जो देश हर दिन हमारे जवानों पर हमले कर रहा है। जवानों को सिर काट रहा है, ऐसे देश को हम पानी क्यों दे।
माना जा रहा है कि कश्मीर के हालातों को देखते हुए पाकिस्तान को उसकी असली औकात समझाने के लिए भारत जल्द ही 57 साल पहले हुए सिंधु जल संधि पर बड़ा फैसला लेने जा रहा है। अगर भारत पाकिस्तान को पानी देना बंद कर दे तो पाकिस्तान की 80 प्रतिशत आबादी प्यासी रहने को मजबूर होगी। साल 1960 के सिंधु जल समझौते के तहत भारत पश्चिमी नदियों के पानी को भी अपने इस्तेमाल के लिए रोक सकता है। इसकी सीमा 36 लाख एकड़ फीट रखी गई है। हालांकि भारत ने अभी तक इसके पानी को रोका नहीं है।

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