साफ्टवेयर की दुनिया में रवि सोनी ने लहराया परचम

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बिहार में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, एक सामान्य परिवार में जन्मे रवि कान्त सोनी ने इसका उदाहरण प्रस्तुत करते हुए साफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में एक अलग पहचान बनायी है. इस 32 वर्षीय युवक ने इसी उम्र में साफ्टवेयर इंजीनियरिंग से सम्बंधित तीन पुस्तकें भी लिखीं हैं, जिसका प्रकाशन UK और USA के प्रकाशकों ने किया है.
कहते हैं कि “पूत के लक्षण पालने में नजर आते हैं”. इस लोकोक्ति को रवि ने बचपन में ही चरितार्थ कारण शुरू कर दिया था. जिस उम्र में सभी बच्चे खेलने- कूदने में मस्त रहते हैं, रवि उसी समय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खेलता था. कभी टेलीफोन का रिसीवर खोल कर देखता था कि आवाज कहा से आ रही है तो कभी ट्रांजिस्टर खोल देता. उसी क्रम में बोलता कि पानी की टंकी में ऐसा अलार्म लगाना चाहिए जिससे कि पानी भरते ही अलार्म बजने लगे.
रवि रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम के बाल विकास विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास करते ही बिहार की राजधानी पटना इंजीनियरिंग का कोचिंग करने आ गया. अपने लगन और मेहनत से बैंगलोर के रीवा विश्वविधालय (REVA University) से Information Science & Engineering में स्नातक किया.

इंजीनियरिंग करने के बाद रवि ने HCL Technology, Banglor; Infosys, Banglor; Mphasis, Banglor के साथ ही i-Admin, Singapur में नौकरी की. अपनी नौकरी के दौरान रवि ने Singapore में latest Software Technology पर काम करके अपनी Company i-Admin को बहुत फायदा कराया. रवि आज अपनी योग्यता और कठिन परिश्रम के बल पर अंतर्राष्ट्रीय बैंक Standard Chartered Bank में अपना एक अलग मुकाम बनाते हुए Technical Manager के पद पर कार्यरत हैं.
रवि ने अपने कार्यस्थल पर कम्पनियों में कई उच्च कोटि के सॉफ्टवेयर बनाने की उपलब्धी भी हासिल की है. उनकी उपलब्धियों में वेब एप्पलीकेशन डेवलोपमेन्ट, बैंक एप्पलीकेशन डेवलोपमेन्ट, ई-कॉमर्स, HR- Payroll सिस्टम आदि Security Lock के साथ शामिल हैं. 2015 में Learning Spring Development Application तथा 2016 में Spring Development Java Applications for the Enterprises नामक रवि लिखित पुस्तक का प्रकाशन Packt Publication, UK से हुआ. अभी हाल ही (2018) में USA के Apress Publication द्वारा इनकी Full Stack AngularJS for Java Developers नामक पुस्तक प्रकाशित हुयी है.
कृषि विभाग में VLW के रूप में कार्यरत रास बिहारी प्रसाद के घर जन्मे रवि कान्त सोनी की माता श्रीमती मनोरमा देवी एक सामान्य गृहणी हैं. शशि कान्त सोनी (M.Com) और श्रीकान्त सोनी (B.tech) दो भाई तथा बहन नम्रता सोनी (B. tech) भी रवि के नक्शेकदम पर हैं. रवि के चाचा जौहरी व्यापारी अरुण कुमार सोनी का योगदान अपने भतीजे एवं भतीजी के शिक्षा- दीक्षा में अनुकरणीय एवं सराहनीय रहा है.
रवि ने मात्र 32 साल की उम्र में आज के युवा वर्ग को तकनीकी जानकारी प्रदान कराने तथा उस जानकारी का सही उपयोग कराने के उद्देश्य से तीसरी किताब लिखने और प्रकाशित कराने का महत्वपूर्णकार्य किया है. अपनी तमाम उपलब्धियों का श्रेय रवि अपने माता पिता, माँ तारा चंडी व अपने शिक्षकों के आशीर्वाद को देते हैं. रवि पुस्तकों के लेखन की प्रेरणा देने का पूरा श्रेय अपने चाचा अरुण कुमार सोनी को देते हैं.
अपने व्यस्ततम जीवन में कार्यस्थल पर पद की जिम्मेवारियों को पूरा करते हुए किसी को शिकायत का मौका नही देते हुए रवि अपने परिवार की देखभाल में भी कभी कोई कमी नहीं आने देते. बचपन से ही स्वयं निर्धारित समय सारिणी के अनुसार सारा कार्य करने की आदत वाले रवि अपनी तमाम उपलब्धियों के पीछे अपनी माता मनोरमा देवी, पिता रास बिहारी, चाचा अरुण कुमार सोनी एवं पत्नी सोनिया का हाथ और सहयोग मानते हैं. रवि का मानना है कि शादी के बाद जहाँ एक ओर पत्नियाँ अपने लिए समय की मांग करती हैं वहीं सोनिया लगातार साफ्टवेयर के क्षेत्र में नये- नये कार्य करने के लिए मुझे प्रेरित करती रही. उन्होंने आशा व्यक्त किया कि भविष्य में भी सोनिया इसी प्रकार योगदान मुझे मिलता रहेगा. रवि आज के युवा पीढ़ी के लिए एक उदाहरण हैं. उनका जीवन इस बात को स्पष्ट करता है कि लगन, आत्मविश्वास और जुनून से इन्सान कुछ भी कर सकता है.

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