सर्वदलीय बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और विशेष पैकेज पर सबका रहा जोर

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पंद्रहवें वित्त आयोग को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने, विशेष पैकेज के साथ ही बिहार के पिछड़ेपन और अतीत में बिहार के साथ हुई नाइंसाफी का मामला छाया रहा. जदयू, भाजपा, राजद, कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में बिहार को विशेष सहायता की मांग करते हुए कहा गया कि इसके बगैर बिहार के साथ न्याय नहीं हो सकता.
आद्री की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में 15वें वित्त आयोग को दिए जाने वाले सर्वदलीय प्रस्तावना पर चर्चा करते हुए जदयू के राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि हमने क्या अपराध किया जो हमारे साथ नाइंसाफी हो रही है. बिहार का शेयर 11.56 से घट कर 9.5 हो गया है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार रघुराम राजन कमिटी रिपोर्ट भूल गई है, जिसने कहा था कि पिछड़े राज्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. बिहार के 22 जिले बाढ़ प्रभावित हैं और बिहार में बाढ़ नेपाल के कारण आता है. हर साल हज़ारों करोड़ की बर्बादी होती है, फाइनेंस कमीशन को यह बताना चाहिए. आरसीपी सिंह ने कहा कि भाड़ा समानीकरण के साथ ही केन्द्र की अन्य नीतियों बिहार के हितों के प्रतिकूल रही हैं. बिहार चारों तरफ जमीन से घिरा होने के कारण लैंड लाक्ड स्टेट है. सांसद ने अपनी बातों से जाहिर कर दिया कि राज्य सरकार 14 वें वित्त आयोग की अनुसंशा से खुश नहीं है. ज्ञात है कि वर्टिकल डिवोल्यूशन के आधार पर केन्द्रीय करों में बिहार का हिस्सा 32 से बढ़ाकर 42 फीसदी किया जा चुका है, जो बिहार के लिए राहत की बात बताई जा रही है. जबकि मॉडरेट रेट के आधार पर 14वें वित्त आयोग ने केन्द्रीय करों में बिहार की हिस्सेदारी 10.91 फीसदी से घटकर 9.6 कर दी गयी है.
बैठक को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि “बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले” यह बात मेमोरेंडम में शामिल होनी चाहिए. साथ ही विशेष पैकेज के PM की घोषणा की भी चर्चा हो. बिहार जैसे पिछड़े राज्य को अतिरिक्त सहायता मिलनी ही चाहिए.


बैठक में कहा गया कि बिहार के पिछड़ेपन का कारण ऐतिहासिक है, इसे स्पेशल सहायता की जरुरत है, तभी यह अपने पिछड़ेपन से बाहर निकल सकेगा. राज्यों को मदद के लिए बने मापदंड में और विस्तार पर बल देते हुए कहा गया कि जनसंख्या, क्षेत्रफल, वनक्षेत्र और वित्तीय प्रबंधन के आधार को और व्यापक बनाते हुए इसमें स्वास्थ्य, किसानों की आय, सीडी रेशियो, पर्यावरण और रोजगार के मुद्दे के साथ ही सहायता के फार्मूला में सामाजिक-आर्थिक इंडीकेटर को भी शामिल किया जाये. क्योंकि बिहार लंबे पिछड़ेपन से परेशान होकर आज अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश में है. ऐसे पड़ाव पर इसे थोड़ी विशेष मदद मिल जाएगी तो वह और बेहतर कर सकता है.
बैठक में मौजूद विपक्षी दलों ने बिहार की बदहाली को लेकर जदयू और भाजपा गठबंधन पर चुटकी लेते तथा केन्द्र और राज्य दोनों में एनडीए की सरकार होने का हवाला देते हुए बिहार को विशेष दर्जा दिये जाने के मांग की वकालत की. राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दकी ने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना ही चाहिए, विशेेष राज्य का दर्जा मिलने में अब देरी क्यों हो रही है?
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 15वें वित्त आयोग का गठन कर दिया है, इसका कार्यकाल 1 अप्रैल 2020 से 2025 तक का होगा, जिसकी रिपोर्ट तैयार करने की कवायद शुरू हो गयी है. आयोग का अध्यक्ष बिहार के पूर्व सांसद एनके सिंह को बनाया गया है, इससे भी 15वें वित्त आयोग से बिहार की उम्मीदें काफी बढ़ गई है. केन्द्रीय वित्त आयोग की टीम 11 जुलाई को दो दिवसीय बिहार दौरे पर आने वाली है जो कई स्थानों का भ्रमण भी कर सकती है.
आर्थिक रूप से कमजोर बिहार राज्य के वित्त विभाग से लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर जहां जरूरत है, वहां इसे लेकर व्यापक तैयारी शुरू हो गयी है.
टीम सबसे पहले सभी पार्टी के जन प्रतिनिधियों से मुलाकात करने के बाद सभी विभागों के प्रधान सचिव के साथ विचार-विमर्श करेगी. बीआईए, बिहार चैंबर्स ऑफ कॉमर्स, बियाडा समेत अन्य संस्थानों के साथ भी बैठक करेगी. राज्य के वित्त विभाग ने पिछले 15 साल के आर्थिक लेखा-जोखा की विस्तृत रिपोर्ट पूर्व में ही भेज दी है.

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