आरक्षण में सरकार को सरकारी विद्यालयों में पढ़े बच्चों को प्राथमिकता देना चाहिए, इससे शिक्षा व्यवस्था की बेहाल हालत सुधर सकती है.
आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को दस फीसदी आरक्षण के लिए 124 वें संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष पूर्व मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सरकार को सरकारी विद्यालयों में पढ़े बच्चों को आरक्षण में प्राथमिकता देनी चाहिए, इससे शिक्षा व्यवस्था की बेहाल हालत सुधर सकती है.
लोकसभा में मंगलवार को केंद्रीय मंत्री थारवचंद गहलोत द्वारा पेश किया गया 124वाँ संविधान संशोधन बिल पांच घंटे की चर्चा के बाद पारित कर दिया गया. इस दौरान पक्ष- विपक्ष के करीब 30 सदस्यों ने अपनी बात रखी. इस दौरान रालोसपा के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने एक ऐसी मांग उठायी, जिसके बारे में आम लोग चौक- चौराहे पर बातें करते मिल जायेंगे.
कुशवाहा ने कहा कि सरकार को सरकारी विद्यालयों में पढ़े बच्चों को आरक्षण में प्राथमिकता देने चाहिए, फिर मामला Sc/Stका हो, OBC या सामान्य वर्ग से जुड़ा हो. इससे शिक्षा व्यवस्था की बेहाल हालत सुधर सकती है. कुशवाहा ने कहा कि आरक्षण आर्थिक समृद्धि का उपाय नहीं है. सरकारी स्कुल में जो बच्चे पढ़ते हैं, उनकी आर्थिक स्थिति सभी जानते समझते हैं.
उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण का लाभ मिले, क्योंकि सरकारी क्षेत्र में तो नौकरियां मिल नहीं रही हैं. वैसे आरक्षण से नौकरी नहीं मिलती है और जैसे ही यह बात समझ में आएगी तो आरक्षण पाने वाले सवर्ण बच्चे भी सरकार के खिलाफ हो जाएंगे.
कुशवाहा ने कहा कि सरकार सत्र को बढ़ाकर न्यायिक नियुक्तियों के लिए भी बिल लेकर आए. मंत्री पद छोड़ने के बाद कुशवाहा पहली बार सांसद के तौर पर भाषण दे रहे थे. उन्हें भाजपा सांसदों के लगातार विरोध का भी सामना करना पड़ा, भाजपा सांसद बीच में लगातार उन्हें टोकते रहे.



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