हर लाडली अपने पिता की आंखों का तारा होती हैं| पिता और बेटी का ये अनोखा रिश्ता शायद ही शब्दों में बयान किया जा सकता है| हर पिता अपनी नन्ही सी गुड़िया के लिए कुछ भी कर सकने की चाह रखता है और उसकी खुशी के लिए कुछ भी हासिल कर सकता है।
आज हम आपको ऐसी ही एक कहानी बताने जा रहे है। दरअसल एक मजबूर पिता को अपनी बेटी की ख्वाहिश पूरी करने में दो साल लग गए। आखिर क्या थी बेटी की ख्वाहिश, और पिता को उसकी ख्वाहिश पूरी करने में दो साल क्यों लगे? आइये आपको बताते है।
बांग्लादेश के निवासी कवसर हुसैन एक हाथ से दिव्यांग हैं। एक हादसे में अपना एक हाथ गंवा चुके हैं। एक दिन उनकी सात साल की बेटी सुमैया ने उनसे नई ड्रेस की मांग की। कवसर सोच में पड़ गए। बेटी की ख्वाहिश पूरी करें तो कैसे?

छोटे-मोटे काम करके किसी तरह कवसर की जिंदगी कट रही थी। एक तरफ बेटी का प्यार और और दूसरी तरफ उनकी मंजबूरी उन्हें रोज परेशान करती। लेकिन कवसर ने ठान ली थी की बेटी के लिए ड्रेस खरीदना है। ऐसे में किसी तरह उन्होंने कुछ पैसे जुटाए और अपनी बेटी के लिए नई ड्रेस खरीदने की सोची। लेकिन इसके बाद जो कुछ भी हुआ वो पढ़कर आप भावुक हो जाएंगे। ये दिव्यांग बाप आज भी सब्जी बेचता है।
यहां हम आपको बता दें कि ये कहानी सोशल मीडिया पर वायरल है। इस कहानी को कवसर हुसैन एक फोटोग्राफर से साझा किया था। जिसके बाद जीएमबी आकाश नाम के फोटोग्राफर ने इस कहानी को अपने फेसबुक वॉल पर शेयर किया।
इस कहानी में आगे क्या हुआ चलिए आपको बताते है। आखिरकार कवसर ने दो साल तक मजदूरी करके बेटी के फ्रॉक के लिए पैसे जमा किए। नई ड्रेस खरीदने के लिए जब वो बेटी के साथ दुकान पर पहुंचे तो दुकानदार ने उसे भिखारी समझकर भगा दिया।
आंसू पोंछते हुए पिता ने कहा- हां मैं भिखारी हूं.

ये देख बेटी सौम्या से नहीं रहा गया और वो अपने पिता को दुकान से बाहर लेकर चली गई। पिता ने एक हाथ से आंसू पोंछते हुए बेटी से कहा ‘हां मैं भिखारी हूं।’
इसी बीच बेटी सौम्या ने कवसर का हाथ पकड़ लिया और रोते हुए कहने लगी कि उसे यह ड्रेस नहीं खरीदनी। फिर कवसर ने अपने एक हाथ से बेटी सौम्या के आंसू पोंछे और फिर वो ड्रेस खरीदी।
फोटोग्राफर जीएम आकाश से कवसर ने कहा कि, ‘आज ये पिता भिखारी नहीं, राजा है और उसकी ये लाडली राजकुमारी।’

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