पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने आज कहा है कि दक्षिण एशिया में टिकाऊ शांति के लिए भारत बड़ा अवरोधक बन गया है। उन्होंने कश्मीर मुद्दे को बंटवारे का अपूर्ण एजेंडा बताते हुए कहा कि भारत क्षेत्र में टिकाउ शांति के लिए बड़ी बाधा बन गया है।
उन्होंने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान एवं भारत के बीच तल्ख द्विपक्षीय संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि पाकिस्तान के शांति प्रयासों पर सकारात्मक जवाब की बजाए भारत ने कुलभूषण जाधव, आतंकवादियों और अन्य जासूसों को भेजा। कश्मीर की स्थिति और जाधव मामले सहित विभिन्न मुद्दों पर भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण है।
राष्ट्रपति ममनून हुसैन से पहले भी कई पाकिस्तानी हुक्मरान कश्मीर को बंटवारे का अधूरा एजेंडा बता चुके हैं। इसी साल जनवरी में पाक के पूर्व आर्मी चीफ राहील शरीफ ने भी ऐसा ही बयान दिया था। फरवरी में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी कहा था कि कश्मीर बंटवारे के दौरान अधूरा रह गया एजेंडा है।

भारत ने पाकिस्तान की इस बयानबाजी पर कड़ा उत्तर देने के साथ ही पाकिस्तान से आतंक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पाकिस्तान उरी हमले के बाद भारत पाकिस्तान के संबंध लगातार तनावपूर्ण चल रहे हैं। भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को उरी हमले का करारा जवाब दिया था।
पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र में अपने सालाना अभिभाषण के दौरान राष्ट्रपति ममनून हुसैन को विपक्ष का विरोध भी झेलना पड़ा और सांसदों ने ‘गो नवाज गो’ जैसे सरकार विरोधी नारे लगाये। विपक्ष की मुख्य दलील है कि सरकार ने बजट पर विपक्षी नेताओं के भाषण का सरकारी चैनल पीटीवी पर सीधा प्रसारण करने से इनकार कर दिया है। विपक्ष ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में अवरोध डालना शुरू कर दिया। कुछ सांसदों ने सीटी बजाई तो कुछ ने नारेबाजी की। विपक्ष के नेता खुर्शीद शाह ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने भाषण में भ्रष्टाचार के प्रमुख मुद्दे पर कोई बात नहीं रखी।

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