मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ सोमवार को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर शपथ लेंगे. नौ बार से छिंदवाड़ा सांसद कमलनाथ ने प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अरुण यादव के साथ राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया.
लंबी माथापच्ची के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ दिल्ली में हुई मीटिंग में उनके नाम पर मुहर लगने के बाद गुरुवार रात में ही कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्हें नेता चुना गया. इसकी जानकारी कांग्रेस पार्टी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट करके दी गयी. विधानसभा चुनाव से करीब छह महीने पहले कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का भार संभाला था.
मुख्यमंत्री के तौर पर नाम का औपचारिक ऐलान होने के बाद कमलनाथ ने कहा कि “मध्यप्रदेश के मतदाताओं ने सच्चाई का साथ दिया, मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि मध्यप्रदेश की जनता के विश्वास के काबिल बना रहूँ. कांग्रेस सरकार में मध्यप्रदेश सुरक्षित रहेगा. मैं सभी को आश्वासन देता हूँ कि हम अपने शपथ पत्र का हर वादा पूरा करेंगे. दस दिन में किसानों की कर्ज माफी का वादा पूरा करेंगे, कृषि और विकास के लिए काम करेंगे. व्यापमं मामले की जांच के सवाल पर कहा कि- “हम अपोज नहीं एक्सपोज करना चाहते हैं. किसी दुर्भावना के मकसद के लिए नहीं बल्कि घोटालों को सामने लाने के लिए जनआयोग बनाया जाएगा.”
उन्होंने कहा कि ‘यह पद मेरे लिए मील का पत्थर है. ज्योतिरादित्यजी का धन्यवाद, जो उन्होंने मेरा समर्थन किया. इनके पिताजी के साथ मैंने काम किया है, इनके समर्थन पर खुशी हुई. अगला समय चुनौती का है, हम सब मिलकर अपना वचन पत्र पूरा करेंगे. मैंने अपना पूरा जीवन बिना किसी पद की भूख के कांग्रेस पार्टी को समर्पित किया है, मेने संजय गांधी जी, इंदिरा जी, राजीव जी और अब राहुल गांधी के साथ काम कर रहा हूँ.


मध्यप्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और छिंदवाडा संसदीय क्षेत्र से 16वीं लोकसभा के सांसद कमलनाथ का जन्म 18 नवम्बर 1946 को कानपुर उत्तर प्रदेश में हुआ था. पंजाबी ब्राह्मण परिवार के पिता महेंद्र नाथ और माता लीला नाथ के पुत्र कमलनाथ की शादी 27 जनवरी 1973 को अलका नाथ से हुई. इनके दो बेटे नकुल नाथ व बकुल नाथ हैं. देहरादून के मशहूर दून स्कूल में स्कूली शिक्षा हासिल करने के बाद कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज से बीकॉम किया. कमलनाथ दून स्कूल में साथ पढ़ने वाले संजय गाँधी के दोस्त थे. अर्थशास्त्र के छात्र रहे कमलनाथ की पहचान एक बड़े कारोबारी की भी है. वाणिज्य और व्यापार क्षेत्र में उनके ज्ञान का सम्मान विरोधी भी करते हैं.
उनकी सियासत मध्य प्रदेश से शुरू होती है, जब 7वीं लोकसभा के लिए 1980 में इंदिरा गाँधी ने उन्हें छिंदवाडा सीट से चुनाव लड़ने के लिए भेजा. यहां से वो अब तक 9 बार (1980, 1985, 1989, 1991, 1998,1999, 2004, 2009 और 2014) लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. 10वीं लोकसभा में वह भारत सरकार में जून 1991 में पर्यावरण एवं वन मंत्री बने, 1995 में केंद्रीय राज्य मंत्री, वस्त्र (स्वतंत्र प्रभार) बनाये गए. वर्ष 2001 से 2004 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव रहे. 2004 से लगातार 5 वर्ष केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री रहे. 2009 में केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री बने. 2011 में केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय बने और 2012 में उन्हें संसदीय कार्यमंत्री की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गयी.
कमलनाथ को वर्ष 2006 में जबलपुर की रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया. 2007 में एफडीआई पत्रिका और फाइनेंशियल टाइम्स बिजनेस ने वर्ष की एफडीआई व्यक्तित्व के रूप में उन्हें सम्मानित किया. 2008 में इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा “बिजनेस रिफार्मर ऑफ द ईयर” से तथा 2012 में एशियाई बिजनेस लीडरशिप फोरम अवॉर्ड्स में “एबीएलएफ स्टेट्समैन अवॉर्ड” से सम्मानित किया जा चूका है.



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