शेल कंपनियों व ऑडिटरों पर जांच एजेंसियों की कड़ी नजर, लाख से अधिक निदेशक अयोग्य घोषित हो सकते हैं

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काला धन छिपाने के लिए अवैध लेन-देन में संलिप्त ऑडिटरों की भूमिका की जांच के लिए कई जाँच एजेंसियों ने शेल कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की नीति अपनायी है.
बताया जाता है कि वित्तीय ब्योरे में असमानता, नेटवर्थ में भारी गिरावट, कंपनी के समूह या प्रवर्तकों को धन स्थानांतरित करने से संबंधित मामलों में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा अन्य नियामकीय प्राधिकरण शेल कंपनियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाये हुए हैं. एजेंसियां इस बात की जांच भी कर रही हैं कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में ऑडिटरों की क्या भूमिका रही है.


सेबी और मंत्रालय विभिन्न कंपनियों खासकर लंबे समय से कारोबार नहीं कर रही कंपनियों के ऑडिटरों पर नजर रख रही हैं. प्राधिकरण गहन आकलन के बाद अगले कदम के बारे में निर्णय लेगी. अवैध लेन-देन और कर चोरी को रोकने के प्रयासों के तहत ही मंत्रालय ने दो लाख से अधिक कंपनियों को रिकॉर्ड से हटा दिया है. परन्तु इनके खिलाफ आगे अभी और कार्रवाई की संभावना है.
सेबी ने इसके अलावा 331 सूचीबद्ध कंपनियों पर भी कार्रवाई की है जिनके ऊपर मुखौटा कंपनी होने का संदेह था. सेबी ने इन कंपनियों पर कड़े अंकुश लगा दिए हैं. सरकार ने कहा है कि शेल कंपनियों से जुड़े होने के कारण 1.06 लाख से अधिक निदेशकों को अयोग्य ठहराया जाएगा.

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