प्रधानमंत्री कार्यालय ने शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) पर शिकंजा कसने के लिए एक टॉस्क फोर्स बनायी है, जिससे कई बड़े लोगो‍ं को भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. नोटबंदी के दौरान अचानक शेल कंपनियों के बैंक जमा काफी बढ़ गये. ऐसा रुपयों के असली मालिक के काले धन को रद्दी होने से बचाने के लिए किया गया. मध्य कोलकाता के लालबाजार स्ट्रीट इलाके मेें एक ही पते पर 400 से ज्यादा कंपनियां रजिस्टर्ड होने की बात सामने आयी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष जब नोटबंदी का एलान किया तो एक बात सामने आई कि नोटबंदी के दौरान अचानक शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के बैंक जमा बढ़ गये हैं. बाद में ऐसे मामले को केंद्र सरकार ने सहज रूप में नहीं लिया. जाँच के बाद फर्जी कंपनियों के ठिकाने के रूप में कोलकाता का नाम प्रमुखता से सामने आने लगा.
सूत्रों के अनुसार मध्य कोलकाता के लालबाजार स्ट्रीट इलाके मेें एक ही पते पर 400 से ज्यादा कंपनियों के नाम रजिस्टर्ड होने की बात सामने आयी है. इस इलाके में और भी कई ऐसे जगह हैं जहां एक ही पते पर कई- कई कंपनियां पंजीकृत हैं. लालबाजार स्ट्रीट के पास ही कोलकाता पुलिस का मुख्यालय भी है. महानगर में एनएस रोड में भी कई फर्जी कंपनियों के ठिकाने का पता चला है.


सूत्रों के अनुसार मनी लांड्रिंग के मामले में कोलकाता का अपना एक विशिष्ट स्थान है. प्रमुख ‍‍व्यवसायिक स्थल होने के साथ ही कोलकाता अन्य व्यवसायिक स्थलों को जोड़ने का भी केंद्रविन्दु है. गत महीने सरकार ने करीब दो लाख शेल कंपनियों को बंद करने का आदेश दिया. नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार का यह निर्देश काफी अहम माना जा रहा है. पहले अंदाजा नहीं लगाया गया था कि मनी लांड्रिंग और आय से अधिक संपत्ति की बात छिपाने के लिए किस हद तक शेल कंपनियों का सहारा लिया गया होगा या लिया जा रहा है. नोटबंदी के दौरान शेल कंपनियों के मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गयी.
प्रधानमंत्री कार्यालय ने संबंधित उच्च अधिकारियों की एक टीम गठित कर उन्हें शेल कंपनियों का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी है. सूत्रों के अनुसार इनके द्वारा करीब एक लाख कंपनियों की जांच चल रही है. प्रधानमंत्री कार्यालय में गत सप्ताह इन कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए बनायी गयी टॉस्क फोर्स की कारवाई एवं ऐसी कंपनियों के खिलाफ नियम सख्त करने वाले कदमों से कोलकाता को काफी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार कालेधन के खिलाफ काफी हद तक युद्ध वाली स्थिति में हैं. शेल या फर्जी कंपनियों पर ऐसी कार्रवाई का काफी असर पड़ेगा. केंद्र सरकार फर्जी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई कर टैक्स चोरी पर अंकुश लगाना चाहती है. स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान भी प्रधानमंत्री ने शेल कंपनियों पर शिकंजा कसने और देश की संपत्ति लूटने वालों या कर चोरी करने वालों से जवाब लेने की बात कही थी.
जानकारों केअनुसार काले धन को सफेद करने का जरिया शेल कंपनियां होती हैं. अधिकांश मामलों में शेल कंपनियों का व्यवसाय सिर्फ कागजों पर चलता है. शेल कंपनियों के जरिये संपत्ति छिपाने वाला शख्स टैक्स की चोरी करता है. हाँलाकि सामान्य कंपनियों की तरह ही शेल कंपनियों का भी रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, उनमें भी निदेशक होते हैं और सामान्य कंपनियों की तरह रिटर्न भी फाइल की जाती है.

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