बिहार के शिक्षा मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि सूबे की शिक्षा व्यवस्था पर माफिया का कब्जा है। तभी, आजादी के 70 वर्ष बाद भी लालकेश्वर और बच्चा राय पैदा हो रहे हैं। सरकार ने इसी पर नकेल कसने के लिए सख्ती की तो रिजल्ट खराब हो गया। जो भी इस नई व्यवस्था के तहत पास हुए हैं, वे 24 कैरेट का सोना है।
शिक्षा मंत्री एसएनएस कॉलेज मुजफ्फरपुर में बीआरए बिहार विवि के पहले कुलपति प्रसिद्ध साहित्यकार व शिक्षाविद श्याम नंदन सहाय की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछले 70 सालों में बिहार की शिक्षा व्यवस्था पतनशील होती चली गई। इस पर शिक्षा माफिया का कब्जा रहा है। इन माफिया ने ही सरकार की रिजल्ट ओरिएंटेड परफॉरमेंस नीति का जमकर लाभ उठाया। गुजरात और दिल्ली सहित अन्य राज्यों से छात्र यहां आकर सिर्फ फॉर्म भरते थे। ऐसे छात्रों की प्रथम श्रेणी की गारंटी के साथ जमकर लूट होती थी।
अब सरकार को समझ में आ गया है। शिक्षा माफिया पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। नाकाम नीति की समीक्षा और बोर्ड शिक्षा की गुणवत्ता के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। ये कमेटी आगे का रास्ता निकालेगी, जो बिहार के युवाओं का दूसरे राज्यों में नकलची की छाप से छुटकारा दिलाएगा। उन्होंने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर देते हुए कहा कि एकेडमिक कैलेंडर का सख्ती से पालन किया जाए। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार को वित्तविहीन शिक्षकों के हितों की चिंता है। वे वर्ष 2016 तक का अनुदान इसी वित्तीय वर्ष में आवंटित करा देंगे।


शिक्षा मंत्री ने कहा कि 2015 के बाद कदाचारमुक्त परीक्षा के लिए पुरजोर प्रयास किया गया, लेकिन जिसको उन्होंने जिम्मेदारी सौंपी वहीं भ्रष्ट निकला। शिक्षा को माफियाओं के कब्जे से दूर करने के लिए सरकार ने गड़बड़ी करने वाले 1500 इंटर कॉलेजों का निबंधन रद्द कर दिया। ऐसे कई कॉलेज सामने आए, जहां क्षमता केवल 200 छात्रों की है, लेकिन वहां 1500 से अधिक छात्रों का परीक्षा फॉर्म भरवाया गया है। 1984 से 2015 तक चाचा, मामा और काका मिलकर दसवीं की परीक्षा में नकल को बढ़ावा देते रहे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि एक शिक्षाविद सहाय जी ऐसे थे, जिन्होंने राज्य के शिक्षा के विकास के लिए अपना जीवन समर्पित किया। अपने गांव बाघी में स्कूल भवन का निर्माण कराने के बाद ही भूकंप में ध्वस्त अपने मकान को बनवाया। शिक्षा बजट को लेकर सरकार से आर-पार लड़ने को तैयार थे। सरकार ने उनकी बात मानी। शिक्षा का बजट कम नहीं किया। वहीं, आज लोग शिक्षा की दुकान चलाते हैं। इसके बल पर करोड़ों कमाते हैं।
इस अवसर पर कुलपति डॉ. अमरेंद्र नारायण यादव, प्रति कुलपति डॉ. रामकुमार मंडल, एसएनएस के शासी निकाय के अध्यक्ष रविनंदन सहाय, सचिव डॉ. शशिरंजन प्रसाद सिन्हा, प्राचार्य डॉ. सुबोध कुमार सिन्हा, डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव, डॉ. शब्बीर अहमद, कमरे आलम खां ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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