शरीयत में किसी तरह का दखल मंजूर नहीं, तीन तलाक पर SC के फैसले से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड नाखुश

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के हाल में आए फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए इसे पर्सनल लॉ पर हमला मानते हुए कहा कि देश के संविधान ने सभी को मजहबी आजादी दी है लिहाजा उसे शरीयत में किसी भी तरह का दखल मंजूर नहीं है।
बोर्ड ने शरिया कानून में सुधार के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का फैसला किया। यह समिति दस दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। जिसपर अगली बैठक में विचार होगा। भोपाल में बोर्ड की मैराथन बैठक में तीन तलाक के साथ ही अयोध्या में राम मंदिर- बाबरी मस्जिद विवाद पर भी चर्चा हुई।

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच द्वारा 3-2 के बहुमत से 22 अगस्त को एक बार में ही तीन तलाक कहने (तलाक-ए-बिद्दत) की परंपरा को असंवैधानिक मानते हुए गैरकानूनी बताया था। इस फैसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया था।
बोर्ड के महासचिव मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी ने मीडिया से पहले मात्र इतना कहा कि तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हम नाखुश हैं। बाद में बोर्ड ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कोर्ट के प्रति पूरा सम्मान है पर मुस्लिम पर्सनल लॉ पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। बताया जाता है कि बैठक में कई सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। बाबरी मस्जिद विवाद के बारे में कहा गया कि इसपर फैसला कोर्ट में होगा।

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