शताब्दी की जगह जल्‍द पटरियों पर दौड़ेगी ये हाईटेक ट्रेन, बुलेट ट्रेन जैसी होगी खूबसूरत

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रेलगाड़ियों की गति बढ़ाने के लिए रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है. इसी प्रयास के तहत रेलवे की ओर से चेन्नई स्थित इंटीग्रल रेल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में ट्रेन 18 नाम से एक खास तरीके का रेक तैयार किया जा रहा है. बुलेट ट्रेन जैसी दिखने वाली ये ट्रेनें सेमी हाई स्पीड ट्रेनें होंगी. रेलगाड़ियों की गति बढ़ाने में ये गाड़ियां रेलवे का बड़ा कदम होंगी. इस गाड़ियों की औसत गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है. फिलहाल देश में गतिमान एक्सप्रेस सबसे तेज गति से चलने वाली ट्रेन है. यह गाड़ी दिल्ली से आगरा के बीच चलाई जाती है. इस रूट पर कुछ दूरी यह गाड़ी 160 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से तय करती है.
”ट्रेन-18” भारतीय रेलवे की सबसे आधुनिक ट्रेन होगी. इस रेलगाड़ी मॉडर्न लुक दिया गया है. इस ट्रेन अत्याधुनिक डिजाइन और तकनीक से लैस है. इस ट्रेन में ड्राइवर के केबिन में ही पूरा मैनेजमेंट सिस्टम दिया गया है. ट्रेन के कैप में बैठा ड्राइवर मेट्रो की तरह ब्रेक कंट्रोल और ऑटोमेटेड डोर कंट्रोल को अपने नियंत्रण में रख सकेगा. इस ट्रेन के अंदर लगाया गया एयर कंडीशन सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस है. ये मौसम के अनुसार तापमान नियंत्रित करता है.
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस रेलगाड़ी में इमरजेंसी बटन दिए गए हैं. वहीं अंदर लगे दरवाजे शीशे के हैं. अंदर का माहौल साउंड प्रूफ है. ऐसे में बाहर गाड़ी का शोर यात्रियों को परेशान नहीं करेगा.
आज के समय में लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस रेलगाड़ी में बैठने वाली सीटों के साथ ही मोबाइल और लैपटॉप चार्ज करने के लिए विशेष तौर पर व्यवस्था की गई है. वहीं यात्रियों के मनोरंजन का भी रेल गाड़ी में पूरा खयाल रखा जाएगा.
इस ट्रेन को बनाते समय विकलांग लोगों की जरूरत को भी ध्यान रखा गया है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अंदर सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं. ट्रेन का इंटीरियर बेहतरीन होगा और साथ ही ट्रेन को वाईफाई और जीपीएस के साथ साथ तमाम अन्य यात्री सुविधाओं से लैस किया गया है.
इस रेलगाड़ी में सीटेें बुलट ट्रेन जेसी आरामदायक दी गई हैं. तेज गति से ट्रेेन चलने पर भी यात्रियों को इस बात का ऐहसास नहीं होगा की गाड़ी तेज चल रही है. इस ट्रेन के अंदर एडवांस्ड सस्पेंशन सिस्टम लगाया गया है. इसके चलते यात्रियों को ब्रेक लगने पर बिलकुल भी झटका नहीं लगेगा.
इस रेलगाड़ी में कुल 16 कोच होंगे. वैकल्पिक कोच में मोटराइज्ड इंजन की व्यवस्था की गई है ताकि पूरी ट्रेन एक साथ तेजी से चल सके और रुक सके. ट्रेन शुरू से लेकर आखिरी तक आपस में जुड़ी होगी.

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