अमेरिका के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नॉर्ट ने कहा कि पीएम मोदी का यह दौरा अमेरिका और भारत के बीच रिश्तों को और मजबूत करेगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत कई मुद्दों पर एक जैसी सोच रखते हैं. इनमें आतंकवाद से लड़ाई, लोगों के बीच जुड़ाव जैसे कई मुद्दें हैं. उन्होंने कहा कि हमारे देश में आने वाले लोगों के लिए जिन्हें वीजा दिया जाता है, उनमें हमेशा ही भारतीयों की संख्या ज्यादा होती है. मुझे नहीं लगता कि वीजा का मुद्दा एजेंडा की बात होगी. अमेरिकी लोग भारतीयों के साथ काफी दोस्ताना संबंध रखते हैं.
मोदी के दौरे से पहले अमेरिका ने भारत को 22 गार्जियन ड्रोन की बिक्री को मंजूरी दी है. यह ऐसी पहली डील है, जो अमेरिका ने किसी गैर नाटो सदस्य देश के साथ की. प्रधानमंत्री की वाशिंगटन यात्रा से पहले इस सौदे को द्विपक्षीय संबंधों की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अपनी यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप प्रशासन के साथ बहु-स्तरीय और विस्तृत साझीदारी बनाने के लिए दूरंदेशी दृष्टिकोण स्थापित करने की मंशा ज़ाहिर की थी. फोन पर एक-दूसरे से तीन बार बात कर चुके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सोमवार को पहली बार आमने-सामने मुलाकात होगी. बातचीत के दौरान तीन मुद्दों पर खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद की जा रही है – रक्षा, आतंकवाद और ऊर्जा. भारत तथा अमेरिका के बीच रक्षा व ऊर्जा साझीदारियों को मजबूत किया जाना बातचीत का बेहद अहम हिस्सा होगा.
दोनों नेता एक-दूसरे के साथ लगभग पांच घंटे बिताएंगे. डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के बाद किसी विदेशी नेता के लिए व्हाइट हाउस में आयोजित होने जा रहा यह पहला रात्रिभोज है. अमेरिका द्वारा भारतीय नौसेना को 22 गार्जियन गैर-हथियारबंद ड्रोन विमानों की बिक्री को मंज़ूरी दिया जाना इस यात्रा का खास पहलू होगा, क्योंकि यह सौदा कई सालों से अटका हुआ था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ऊर्जा साझीदारी पर ज़ोर दिए जाने की उम्मीद है, और इत्तफाक है कि यह यात्रा उस समय हो रही है, जब अमेरिका में ऊर्जा सप्ताह मनाया जा रहा है. व्हाइट हाउस अधिकारियों का कहना है कि भारतीय ऊर्जा कंपनियों ने अरबों अमेरिकी डॉलर के तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के सौदों पर दस्तखत किए हैं.

तीन देशों की विदेश यात्रा के दौरान अमेरिका पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यात्रा में सबसे पहले दुनिया की बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ ब्रेनस्टॉर्मिंग सत्र में शिरकत करेंगे. 200 साल पुराने विल्लार्ड होटल में आयोजित होने जा रहे इस सत्र में अमेज़न के प्रमुख जेफ बेज़ोस, एप्पल के टिम कुक, माइक्रोसॉफ्ट के सत्या नडेला और गूगल के सुंदर पिचाई के भी शामिल होने की संभावना है.
इसके बाद वह बेहद नज़दीक वर्जीनिया के निकट एक इलाके में आयोजित स्वागत भोज में भारतीय समुदाय के लोगों से मिलेंगे. गौरतलब है कि अमेरिका में लगभग 40 लाख भारतीय अमेरिकी बसते हैं, और लगभग 1,66,000 भारतीय विद्यार्थी यहां पढ़ाई भी कर रहे हैं. मोदी के अमेरिका पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों के एक समूह ने उनका शानदार स्वागत किया. एक झलक पाने के लिए भारतीय समुदाय के लोगों का एक समूह विलार्ड इंटर कॉन्टिनेन्टल होटल के बाहर उनका घंटों से खड़े रहकर इंतज़ार कर रहा था, और जैसे ही PM की गाड़ियों का काफिला होटल पहुंचा, लोग खुशी से ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाने लगे.
इस बीच, अमेरिकी सीनेटर कमला हैरिस ने ट्वीट किया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका में स्वागत करती हूं और दोनों देशों के बीच अटूट जुड़ाव की पुष्टि करती हूं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एहसास है कि भारत अच्छाई के लिए एक ताकत है और यह बात सोमवार को दौरे के माध्यम से परिलक्षित होगी. दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत के दौरान रक्षा सहयोग, आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने, असैन्य परमाणु समझौते, आतंकवाद से निपटने पर सहयोग, भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग पर चर्चाएं तथा एच-1बी कार्य वीज़ा को लेकर भारत की चिंताओं आदि पर चर्चा होगी.
PM का यह दौरा अमेरिका-भारत रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने का एक अवसर है, जिस बारे में डोनाल्ड ट्रंप का नज़रिया है कि यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र एवं विश्व में स्थिरता और सुरक्षा को आगे बढ़ाने के लिए एक अहम भागीदारी है. हमें लगता है कि उनकी चर्चाएं बहुत व्यापक होंगी, जिनमें कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे शामिल होंगे, जिनमें हमारी साझा प्राथमिकताओं – आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक विकास तथा समृद्धि को गति देना आदि – को आगे बढ़ाना अहम होगा.

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