हनुमान जयंती का पर्व 11 अप्रैल को इस वर्ष कई लिहाज से खास है और भक्तों पर हनुमान जी की विशेष कृपा होगी। तिथि, वार और नक्षत्र के लिहाज से करीब 120 साल बाद ऐसे संयोग बन रहे हैं जैसे शास्त्रों मे हनुमान जी के जन्म के समय बताए गए हैं।
इस वर्ष हनुमान जयंती पर मंगलवार, पूर्णिमा तिथि, चित्रा नक्षत्र रहेगा। शास्त्रों मे हनुमानजी के जन्म के समय ऐसा ही संयोग बताए गए है। इस दिन गजकेसरी योग और अमृत योग भी बन रहा है। इस बार एक विशेष बात यह भी है कि इस संवत्सर के राजा भी मंगल हैं। ऐसे संयोग में जिन जातकों पर शनि की साढे; साती अथवा ढैया या शनि की विपरित महादशा चल रही है उसके निवारण के लिए यह दिन विशेष शुभ रहेगा।
हनुमानजी का जन्म एक करोड़ पिचयासी लाख अट्ठावन हज़ार एक सौ तेरह वर्ष पहले चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में प्रात: 6:03 बजे हुआ था। इस दिन जीवन में अभावों, कष्टों के निवारणार्थ हनुमानजी की मूर्ति पर सिन्दूर से टीका कर लाल पुष्प अर्पित करें, मूर्ति पर सिन्दूर लगाने के पश्चात् धूप-दीप, अक्षत, लाल पुष्प एवं नैवेध आदि से पूजन करें। लाल वस्त्र चढ़ावें, सरसों या तिल के तेल का दीपक एवं धूप जला दें।




हनुमानजी के लिए दीप-दान अतिप्रिय है। हनुमानजी के दीप-दान में देव प्रतिमा के आगे, प्रमोद के अवसर पर, ग्रहों के निमित्त, ग्रहों में और चैराहों पर इन छ: स्थलों में दीप जलाना चाहिए। स्फटिक शिवलिंग के समीप शालीग्राम शिला के निकट हनुमानजी के लिए किया हुआ दीप-दान भोग और लक्ष्मी प्राप्ति हेतु कहा गया है। विघ्न एवं संकटों का नाश करने के लिए गणेश जी के निकट हनुमान जी के लिए दीपदान करें, व्याधि नाश तथा दुष्ट ग्रहों की दृष्टि रक्षा के लिए चैराहों पर दीप-दान करना चाहिए।
बन्धन से छूटने के लिए राजद्वार अथवा कारागार के समीप दीप-दान करना चाहिए। सम्पूर्ण कार्य की सिद्धि के लिए पीपल और वट वृक्ष के नीचे दीप-दान करने का विधान है। भय निवारण और विवाद की शान्ति के लिए, ग्रह संकट एवं ज्वर उतारने आदि के लिए राजद्वार पर हनुमानजी के लिए दीप-दान अवश्य करना चाहिए। हनुमान उपासना में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना आवश्यक है।
वैसे भी धन और समृद्धि प्राप्ति के लिए प्रतिदिन रात्रि में सोने से पूर्व हनुमान जी के सम्मुख सरसों के तेल का मिट्टी का दीपक जलाएं और सुन्दरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। धन आगमन मार्ग को बाधारहित करने के लिए रामायण या श्रीरामचरित मानस का पाठ या रोजाना इनके दोहे करना चाहिए। प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को सिंदूर एवं चमेली का तेल हनुमानजी को अर्पित करना चाहिए। इससे भक्त की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। हर मंगलवार और शनिवार को किसी भी हनुमान मंदिर में 11 काले उड़द के दाने, सिंदूर, चमेली का तेल, फूल, प्रसाद अर्पित करें।




हनुमानजी का फोटो घर में पवित्र स्थान पर इस प्रकार रखना चाहिए कि हनुमान जी दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए दिखाई दें। यह उपाय आपके विरोधियों को शान्त कर, धन देगा। जीवन के सारे दुख दूर करने के लिए मंगलवार या शनिवार को 11 पीपल के पत्ते लेकर साफ जल से धो इन पत्तों पर चंदन से या कुमकुम से श्रीराम का नाम लिखने के बाद हनुमानजी के मन्दिर में उन्हें ये पत्ते अर्पित कर दें। ये सारी जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया जा रहा है।



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