विपक्ष ने दिया CJI के खिलाफ महाभियोग नोटिस : जेटली बोले बदले की कार्रवाई

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सात राजनीतिक पार्टियों कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई-एम, सीपीआई, सपा, बसपा और मुस्लिम लीग के 60 से ज्‍यादा सांसदों ने भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाने का नोटिस दिया है. नोटिस पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, अभिषेक मनु सिंघवी और सलमान खुर्शीद ने दस्तखत नहीं किए हैं. यह पहला अवसर है जब देश के प्रधान न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए उन पर महाभियोग चलाने के प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है.
सांसदों के हस्ताक्षरीत नोटिस राज्य सभा के सभापति और उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू को सौंपा गया है ताकि महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जा सके. कांग्रेस के अनुसार नोटिस में 71 सांसदों के साइन हैं, इनमें से 7 सांसद रिटायर हो चुके हैं. ज्ञात है कि एक दिन पूर्व बृहस्‍पतिवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने जज बीएच लोया हत्‍या मामले की स्‍वतंत्र जांच को लेकर दाखिल याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी, जिसकी सुनवाई सीजेआई की अध्‍यक्षता वाली एक बेंच कर रही थी. जज लोया सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में सुनवाई कर रहे थे.
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए लाये गये प्रस्ताव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी चिदंबरम, अभिषेक मनु सिंघवी और सलमान खुर्शीद ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं. प्रस्ताव पर मनमोहन सिंह आदि के हस्ताक्षर नहीं करने के सवाल पर कपिल सिब्बल ने सफाई देते हुए कहा कि हमने मनमोहन सिंह और अन्य प्रमुख नेताओं जैसे पी चिदंबरम और अभिषेक मनु सिंघवी को जानबूझ कर इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया है. सिब्बल ने कहा कि यह एक गलत खबर है कि मनमोहन सिंह ने महाभियोग पर साइन करने से इंकार कर दिया है.


वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सलमान खुर्शीद ने पार्टी के महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने के मामले में कहा कि यह संवेदशनशील मसला है और अपने रुख पर समय पर आधिकारिक स्पष्टीकरण होगा. मैं यह नहीं मानता हूं कि इस संवेदनशील विषय पर हम बार-बार चर्चा करें.
महाभियोग प्रस्ताव पर टीएमसी, टीडीपी, बीजेडी, आरजेडी, डीएमके, टीआरएस, AIADMK ने इस प्रस्ताव का फिलहाल समर्थन नहीं किया है. राज्यसभा में संख्याबल के आधार पर टीएमसी, टीडीपी और बीजेडी काफी मजबूत दल हैं.
मुख्‍य न्‍यायाधीश के खिलाफ कांग्रेस द्वारा महाभियोग लाने पर वित्‍तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस CJI के खिलाफ महाभियोग के नोटिस को राजनीतिक हथकंडे की तरह इस्‍तेमाल कर रही है. वित्‍तमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया हत्‍याकांड की जांच की मांग से सबंधी याचिका को खारिज करके उनकी मंशा को एक्‍सपोज कर दिया तो कांग्रेस CJI दीपक मिश्रा को हटाने के लिए महाभियोग का नोटिस देकर बदले की कार्रवाई करना चाह रही है. जबकि अक्षमता और कदाचार साबित होने पर ही सुप्रीम कोर्ट के जज पर महाभियोग चलाने का प्रावधान है.
इस महाभियोग को हरी झंडी मिलती है तो देश के इतिहास में यह पहली बार होगा जब किसी CJI के खिलाफ महाभियोग चलाया जाएगा. ज्ञात है कि अक्षमता और कदाचार साबित होने पर ही सुप्रीम कोर्ट के जज पर महाभियोग चलाने का प्रावधान है. CJI, सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट अथवा किसी भी जज के खिलाफ महाभियोग के नोटिस को उच्‍च सदन यानी राज्‍यसभा में कम से कम 50 सांसदों और लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों का समर्थन चाहिए.
महाभियोग का नोटिस मिलने के बाद राज्‍यसभा के सभापति इस प्रस्‍ताव पर विचार करेंगे कि यह मामला महाभियोग चलाने लायक है या नहीं और संतुष्‍ट होने पर एक कमेटी गठित करेंगे जो इस मामले को देखेगी अन्‍यथा वे इसे खारिज भी कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज को पदमुक्‍त करने के लिए दोनों सदन में उपस्थित सदस्‍यों का दो तिहाई बहुमत से पारित होना जरूरी है. इसके बाद राष्‍ट्रपति उस जज को हटाने की आज्ञा देते हैं.

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