CBI के अनुसार बंद हो चुकी एयरलाइंस किंगफिशर के मालिक विजय माल्या का IDBI बैंक से लिया गया लोन चुकाने का कोई इरादा नहीं था, माल्या पर बैंक का 900 करोड़ रुपये बकाया है।
CBI ने पिछले हफ्ते माल्या द्वारा लोन न चुकाए जाने के मामले में पूरक आरोप पत्र दायर किया था। CBI ने मुंबई की अदालत में माल्या, किंगफिशर एयरलाइंस के अधिकारियों और IDBI बैंक के अधकारियों को आरोपी बनाया है। CBI ने आरोपपत्र में सबूत के तौर पर छह जनवरी 2012 को विजय माल्या द्वारा यूनाइटेड स्पीरीट्स लिमिटेड (USL) के वरिष्ठ अधिकारी पीए मुरली को भेजे ईमेल की प्रति संलग्न की है।
जिसके अनुसार माल्या द्वारा भेजे गए ईमेल में कहा गया है कि- “IDBI से कई ईमेल आए हैं, KFA अकाउंट के नॉन-पर्फार्मिंग एसेट (NPA) बन जाने के बारे में। वो अचानक ही कुछ कर सकते हैं। कल ही उन्होंने मेरे USL अकाउंट से 10 करोड़ रुपये काट लिए।” इसी साल जनवरी में CBI द्वारा दायर चार्जशीट में कहा गया था कि IDBI के अधिकारियों ने माल्या द्वारा लोन चुकाने के बाद किंगफिशर एयरलाइंस ब्रांड को “सिक्योरिटी” के तौर पर रखने को लेकर कोई कानूनी सलाह नहीं ली थी। CBI के अनुसार ये विजय माल्या का आइडिया था कि किंगफिशर के “ब्रांड वैल्यू” को लोन के सिक्योरिटी के तौर पर लिया जाए। CBI के अनुसार माल्या ने 10 सितंबर 2008 को UB ग्रुप के CFO रवि नेदुगड़ी को लिखे मेल में ये आइडिया दिया था।

साल 2009 में माल्या ने भारतीय स्टेट बैंक को किंगफिशर की “ब्रांड वैल्यू” को सिक्योरिटी के तौर पर रखने का प्रस्ताव दिया था। किंगफिशर की “ब्रांड वैल्यू” 3365 करोड़ रुपये बताई गई। CBI के अनुसार IDBI एवं अन्य बैंकों के अधिकारियों को यकीन दिलाया गया कि “ब्रांड वैल्यू” को सिक्योरिटी के तौर पर रखने का आइडिया बाहरी विशेषज्ञों द्वारा काफी गहन जांच के बाद सामने आया है, जबकि माल्या ने मिलीभगत करके जांच रिपोर्ट तैयार करवायी थी।
CBI के अनुसार माल्या ने IDBI को दो स्वतंत्र विशेषज्ञों की “ब्रांड वैल्यू” रिपोर्ट देने की बात कही थी, लेकिन आखिरकार उन्होंने केवल एक रिपोर्ट सौंपी जो उनके फायदे की थी। ग्रांट थॉर्नटन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में साफ लिखा है कि वो केवल “आंतरिक प्रयोग” के लिए है न कि “निवेश के लिए सुझाव” है। क्योंकि माल्या को पता था कि ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट में किंगफिशर की “ब्रांड वैल्यू” मात्र 1911 करोड़ रुपये आंकी गई है।
विजय माल्या पर विभिन्न भारतीय बैंकों के करीब नौ हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। बैंकों द्वारा साझा रूप से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद माल्या ब्रिटेन फरार हो गए थे। उस समय माल्या राज्य सभा सांसद भी थे और ब्रिटेन जाने से एक दिन पहले भी वो संसद की कार्यवाही में शामिल हुए थे। बाद में भारतीय अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया। इस समय लंदन की अदालत में माल्या पर प्रत्यर्पण का केस चल रहा है। अगर भारत केस जीत जाता है तो माल्या को वापस लाया जा सकेगा। माल्या खुद के फरार होने या भगोड़ा होने के आरोपों से इनकार करते हैं।

हर ताज़ा अपडेट पाने के लिए Pileekhabar के Facebook पेज को लाइक करें


loading…

Loading…



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *