शराब कारोबारी विजय माल्या (62) का अब ब्रिटिश सरकार कभी भी प्रत्यर्पण कर सकती है. वेस्टमिंस्टर अदालत ने जज एम्मा आर्बटनॉट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पहली नजर में माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश रचने और मनी लॉन्डरिंग का केस बनता है. प्रत्यर्पण के फैसले पर केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि “भारत के लिए महान दिन है”. वहीं कॉरपोरेट इतिहासकार प्रकाश बियाणी ने कहा कि “उम्मीद करें कि माल्या अब पहले जितने एरोगेंट नहीं रहे होंगे, उन्हें सुब्रत रॉय से सबक सीखना चाहिए जिन्होंने अदालत व सेबी का मजाक उड़ाया फलस्वरूप संपदा भी खोई और महीनों जेल में भी रहे.
वेस्टमिंस्टर अदालत के जज एम्मा आर्बटनॉट फैसला दिया कि भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या (62) को ब्रिटेन से भारत प्रत्यर्पित किया जाए. जिनपर पहली नजर में धोखाधड़ी, साजिश रचने और मनी लॉन्डरिंग का केस बनता है. माल्या पर भारतीयों बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपए बकाया हैं. मार्च 2016 में माल्या लंदन भाग गया था और भारत ने 2017 के फरवरी में यूके से उसके प्रत्यर्पण की अपील की थी. भारत में फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अप्रैल 2017 में स्कॉटलैंड यार्ड में माल्या की गिरफ्तारी हुई पर वह जमानत पर छूट गया. माल्या के प्रत्यर्पण का मामला 4 दिसंबर 2017 से लंदन की अदालत में चल रहा था.
यूके की अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए CBI ने कहा कि- “हमने तथ्यों और कानून के आधार पर मजबूती से अपना पक्ष रखा था और हम पूरी तरह आश्वस्त थे कि माल्या को प्रत्यर्पित किया जाएगा. माल्या ने जानबूझकर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया, वह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत भगोड़ा घोषित है. उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है, वह ब्रिटेन के कानून के मुताबिक भी आरोपी है. हमें उम्मीद है कि माल्या को जल्द भारत लाया जाएगा और हम उसके खिलाफ मामलों में नतीजे पर पहुंचेंगे.”


फैसले से पहले कोर्ट पहुंचे माल्या ने कहा कि मैंने रुपए लौटाने का प्रस्ताव दिया है. मेरे इस ऑफर का प्रत्यर्पण से कोई लेना-देना नहीं है. मैंने पैसे चुराए नहीं, मैंने किंगफिशर एयरलाइंस को बचाने के लिए अपने 4 हजार करोड़ रुपए इसमें लगाए थे. इसके पूर्व माल्या का कहना रहा है कि उसके खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित है. उसे भारत में न्याय मिलने के आसार कम हैं. उसके खिलाफ नए आरोप भी लग सकते हैं. उसने एक रुपया भी उधार नहीं लिया, किंगफिशर एयरलाइंस ने लोन लिया था. कारोबार में घाटा होने की वजह से लोन की रकम खर्च हो गई. वह सिर्फ गारंटर था और यह फ्रॉड नहीं है. वह कर्ज का 100% मूलधन चुकाने को तैयार है, 2016 में कर्नाटक हाईकोर्ट में भी यह ऑफर दिया था. रकम चुराकर भागने की बात गलत है, उसे बैंक डिफॉल्ट का पोस्टर बॉय बना दिया गया है. माल्या का कहना था कि भारतीय जेलों की हालत अच्छी नहीं है, जिसके बाद यूके की अदालत ने भारत से जेल का वीडियो मांगा था और भारत ने मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 का वीडियो भेजा था, जहां माल्या को रखा जाएगा. वीडियो देखने के बाद कोर्ट ने संतुष्टि जताई.
माना जा रहा है कि यूके सरकार अदालत के फैसले से संतुष्ट होती है तो वह माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश जारी करेगी. हाँलाकि फैसले के खिलाफ माल्या के पास 14 दिन में हाईकोर्ट में अपील का अधिकार भी है. माल्या ने अगर फैसले के खिलाफ अपील नहीं की तो यूके की सरकार के आदेश जारी करने के 28 दिन में उसका प्रत्यर्पण हो जाएगा.
मार्च 2012 में माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस ने यूरोप और एशिया के लिए फ्लाइट्स बंद कर दीं और घरेलू बाजार में 340 फ्लाइट्स को घटाकर 125 कर दिया. आठ माह बाद अक्टूबर 2012 में किंगफिशर की सारी फ्लाइट्स बंद हो गईं. 2013-14 तक एयरलाइंस का घाटा बढ़कर 4,301 करोड़ रुपए हो गया और माल्या दुनिया के टॉप-100 अमीरों की लिस्ट से बाहर हो गया. लोन पर ब्याज बढ़ता गया और मार्च 2016 तक माल्या 9,000 करोड़ रुपए का कर्जदार हो गया और विदेश भाग गया.
भारत की 48 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि है. 2014 से अब तक आर्थिक अपराध के मामलों में 5 अपराधियों का प्रत्यपर्ण हुआ है. भारत और यूके के बीच साल 1992 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी, तब से अब तक यूके से सिर्फ एक आरोपी समीरभाई वीनूभाई पटेल का प्रत्यर्पण अक्टूबर 2016 में हुआ है जो 2002 के गुजरात दंगों में आरोपी था. यूके में भारतीय भगोड़े विजय माल्या (बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने का आरोपी), नीरव मोदी (पीएनबी घोटाले का आरोपी), ललित मोदी (वित्तीय अनियमितताओं का आरोपी), टाइगर हनीफ (साल 1993 के गुजरात धमाकों का आरोपी), नदीम सैफी (गुलशन कुमार हत्याकांड का आरोपी), रवि शंकरन (नेवी वॉर रूम लीक मामले में आरोपी) और रेमंड वार्ले (गोवा में बच्चों के यौन शोषण का आरोपी) फिलहाल रह रहे हैं.
ज्ञात है कि ज्यादातर बड़े अपराधी यूके भागते हैं क्योंकि यूरोपियन कन्वेंशन ऑन ह्यूमन राइट्स पर यूके ने दस्तखत किए हैं, जिसके तहत अगर यूके की अदालतों को लगता है कि किसी व्यक्ति को प्रत्यर्पित किया गया तो उसे प्रताड़ित किया जा सकता है या राजनीतिक कारणों से प्रत्यर्पण किया जा रहा है तो वह प्रत्यर्पण की अपील को खारिज कर सकती है.



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