प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गरीब से गरीब, आदिवासी, पिछड़े भाई बहन के जीवन में बदलाव लाना है तो एक ही उपाय है, विकास। हम जितनी तेजी से विकास करेंगे जनसामान्य की जिदंगी को बदलने में कामयाब होंगे। उन्होंने कहा कि सदियों से बहनेवाली गंगा मां जीवन धारा के रूप में बह रही है। मां गंगा यहां के लोगों के लिए नई ताकत देगी। गंगा नदी पर बनने वाला यह पुल झारखंड को दुनिया से जोड़ेगा। यहां के लोगों के लिए विकास के नए दरवाजे खोलेगा। यहां के उत्पाद चिप्स, कोयला दूसरे राज्यों-देशों को भेजा जा सकता है। उन्होंने आगे कहा, जलमार्ग के विकास से झारखंड का विकास होगा और यातायात के कई रास्ते खुल जाएंगे।




PM ने कहा कि झारखंड का विकास होने से अब कोई रोक नहीं सकेगा। गंगा पुल बनने से बिहार और झारखंड के बीच की दूरी कम हो जाएगी। साथ ही ये सड़क सांथाल इलाके की शक्ल-सूरत बदल देगी। मोदी ने कहा कि यातायात के लिए उनकी सरकार नदियों का जोरों से इस्तेमाल कर रही है।
सोलर एनर्जी पर मोदी ने कहा कि देश इसकी तरफ तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया से बिजली खरीदने में महंगी पढ़ती है, लेकिन सोलर एनर्जी से ये मुश्किल आसान हो सकती है। सोलर एनर्जी में एक बार खर्चा लगता है, लेकिन बाद में बहुत सस्ती बिजली मिलती है। कोयले के पैदा होने वाली बिजली के मुकाबले सौर ऊर्जा से सस्ती बिजली मिल पाएगी।
मोदी ने कहा कि नोटबंदी के बाद लोगों में ईमानदारी से जीने की इच्छा पैदा हुई है। आज का युवा भ्रस्टाचार के खिलाफ है, क्योंकि वो हमारी सरकार के साथ है। देश में ईमानदारी का युग आ गया है। युवा ईमानदारी के साथ आगे बढ़ना चाहता है और मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाता रहूंगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार दोपहर 1.20 बजे दो हजार करोड़ से बनने वाले गंगा पुल सहित कुल चार हजार करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास किया। इसके बाद पहाड़िया बटालियन के लिए चयनित महिला सिपाहियों को नियुिक्त का पत्र बांटा। उन्होंने डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए सखी मंडल की सदस्यों को मोबाइल फोन भी बांटा। पीएम मोदी ने संथाली में लोगों का अभिवादन किया।



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इससे पहले मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पीएम ने झारखंड को गंगापुल, बंदरगाह, और हाईवे की सौगात दी है। पुल बनने के बाद रोजगार के साधन खुलेंगे। संताल परगना का विकास होगा। जलमार्ग से देश के साथ राज्य भी जुड़ेगा। डिजिटल पर झारखंड सरकार जोर दे रही है।
हर गांव में बिजली देने का काम राज्य सरकार कर रही है। प्रधानमंत्री ने 2019 तक का लक्ष्य दिया था जिसे हम 2018 में पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस पुल और बंदरगाह से नेपाल, भुटान और दक्षिणपूर्व एशिया से व्यापर बढ़ाने में मदद मिलेगी। झारखंड में प्रतिभाओं और मिनरल की प्रचूरता है। महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर कई बड़े कदम उठाएं हैं। पशुपालन के लिए हमने कई योजनाएं शुरू की।
मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू, केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने गुलदस्ता और झारखंड के क्रांतिकारी सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा देकर पीएम का स्वागत किया। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी का झारखंड के मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा देकर सम्मानित किया।
यह पुल साहिबगंज से बिहार के कटिहार जिले के मनिहारी को जोड़ेगा। झारखंड में गंगा नदी पर बननेवाला यह पहला पुल है। सब कुछ तय समय पर हुआ, तो 2021 तक संताल से सीमांचल और उत्तर बिहार की दूरी आठ से 10 घंटे की जगह एक-दो घंटे में तय की जा सकेगी। इस पुल के जरिये झारखंड का उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ सीधा संपर्क होगा। इससे क्षेत्र की तरक्की का रास्ता भी खुलेगा।
गंगा पर पुल निर्माण शुरू होने के साथ लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। आंकड़े बताते हैं कि एक किलोमीटर राजमार्ग के निर्माण में 4076 मानव दिवस के लिए रोजगार का सृजन होता है। इस आधार पर 21.9 किलोमीटर की परियोजना से करीब 89,000 मानव दिवस के लिए रोजगार का सृजन होगा।



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साहिबगंज में 111 एकड़ जमीन पर 500 करोड़ रुपए की लागत से बंदरगाह के निर्माण की भी योजना है। जलमार्ग (गंगा के रास्ते) से व्यापार के लिए यह बंदरगाह वाराणसी से कोलकाता के बीच बनाया जा रहा है। यह क्षेत्र झारखंड का बड़ा व्यापार केंद्र बनेगा। बंदरगाह बनने के बाद गंगा पुल के रास्ते उत्तरी बिहार और म्यांमार तक माल भेजा जा सकेगा। इसके अलावा झारखंड से देश के पूर्वोत्तर के राज्यों तक पहुंच होगा। भविष्य में रोजगार के कई रास्ते खुलेंगे।
झारखंड में गंगा केवल साहिबगंज जिले में 83 किलोमीटर तक बहती हैं। बिहार में गंगा पर पांच पुल हैं। महात्मा गांधी सेतु- 5.7 किमी, विक्रमशिला सेतु- 4.7 किमी, दीघा-सोनपुर रेल सह सड़क पुल- 4.5 किमी, मुंगेर रेल सह सड़क पुल- 3.1 किमी त्तथा राजेंद्र सेतु- 2 किमी, 2226 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला साहिबगंज पुल उन सबसे लंबा होगा। यही नहीं यह देश का यह दूसरा सबसे लंबा पुल भी होगा। इसकी कुल लंबाई तो लगभग 22 किमी होगी, लेकिन गंगा पर इसका करीब छह किमी भाग होगा। शेष हिस्सा एप्रोच रोड पर आएगा।
भाजपा प्रवक्ता पूर्व गृह सचिव जेबी तुबिद ने कहा कि साहिबगंज से मनिहारी तक गंगा पुल का निर्माण सिर्फ एक अभियांत्रिकी उपलब्धि नहीं है। दरअसल यह उस बदलाव की शुरुआत है, जो उत्तर भारत में परिवहन क्रांति लाने वाली है। यहाँ बंदरगाह बनने के बाद जलमार्ग से इसका सीधा जुड़ाव हल्दिया, इलाहाबाद, फरक्का और पटना से हो जाएगा। इससे इस क्षेत्र में नौकरी की संभावनाएं बढ़ेंगी। आज से 30 साल बाद साहिबगंज की तस्वीर कुछ वैसी हो जाएगी, जो फरक्का बैराज बनने के बाद मालदा सिटी की बनी।

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