लोकसभा चुनाव के साथ एक दर्जन राज्यों में हो सकते हैं चुनाव

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लोकसभा चुनावों के साथ लगभग एक दर्जन राज्यों में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. इनमें वैसे राज्य शामिल हो सकते हैं जंहा एक वर्ष के बीच चुनाव होने हैं. इसके लिए ऐसी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं जिससे कुछ राज्यों में चुनाव टल सकें और कुछ राज्यों में समय से पहले चुनाव कराए जा सकें.
विधि आयोग के चैयरमैन बीएस चौहान ने “एक देश एक चुनाव” के मुद्दे पर देश की दोनों बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों के प्रतिनिधि मंडलों से उनकी राय जानने के लिए बुलाया. इससे पहले पिछले ही महीने कई क्षेत्रीय पार्टियों को “एक देश एक चुनाव” पर राय जानने के लिए बुलाया गया था. सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग और अधिकांश राजनीतिक पार्टियां “एक देश एक चुनाव” के फ़ॉर्मूले पर राज़ी हैं. हाँलाकि तमाम दलों की सहमती के बावजूद अगले शीतक़ालीन सत्र में संविधान में मामूली संशोधन करना पड़ेगा.


चुनाव आयोग पहले ही कह चुका है कि आयोग लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए तैयार हैं. लोकसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम में तथा हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव अक्टूबर 2019 में होने हैं. लोकसभा चुनावों के साथ ही ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना विधानसभा चुनाव होंगे. उधर जम्मू कश्मीर में फिलहाल राज्यपाल शासन है जहां लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराने में कोई दिक्कत ही नहीं है. एनडीए में शामिल जदयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने “एक देश एक चुनाव” के विचार पर अपनी सहमति जताते हुए कहा कि, यह वैचारिक रूप से सही है लेकिन लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ नहीं कराया जा सकता, यह संभव नहीं है. हालांकि उन्होंने भजपा के “एक देश एक चुनाव” के फ़ॉर्मूले पर अपनी सहमति दे दी है, उस स्थिति में संभव है कि बिहार में भी लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव हो जाए.
भाजपा के रणनीतिकार 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ लगभग एक दर्जन राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की सम्भावनाओं को तलाश रहे हैं. भाजपा इसके द्वारा “एक देश एक चुनाव” का एक बड़ा उदाहरण पेश कर सकती है. हाँलाकि प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के लिए यह एक जोखिम भरा निर्णय होगा, क्योंकि इस क्रम में हुई एक छोटी सी ग़लती पार्टी को बड़ा नुक़सान पहुंचा सकती है.
हालांकि पूर्व लोकसभा महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने कुछ राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राष्ट्रपति शासन सिर्फ सांविधानिक व्यवधान की स्थिति में ही लगाया जा सकता है.

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