लालू का नुक्कड़ नाटक साबित होगा आत्मघाती : नीतीश कुमार

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव द्वारा भागलपुर में की गई जनसभा को नुक्कड़ नाटक बताते हुए कहा कि यह आत्मघाती साबित होगा। उधर जदयू ने भागलपुर के भाषण में इस्तेमाल किए गए शब्दों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि लालू प्रसाद मर्यादा की लक्ष्मण रेखा पार न करें नहीं तो उल्टा पड़ जाएगा। आगे बोलने से पहले अपनी भाषा को नियंत्रण में रखे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को लालू यादव द्वारा भागलपुर में की गई जनसभा को नुक्कड़ नाटक कहा। यह आत्मघाती साबित होगा। मेरे बारे में कैसी कैसी बातें कहीं जा रही हैं। मैं तो उन पर ध्यान भी नहीं देता। कोई कुछ भी कहता रहे मैं कहां तक संज्ञान लेता रहूंगा। मेरी आदत नहीं है बिना किसी कारण के इस तरह के बहस में पड़ने की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सृजन घोटाले की जांच CBI कर रही है। कुछ लोग कहते हैं जांच कोर्ट की मॉनिटरिंग में होनी चाहिए। इसमें बिहार सरकार क्या कर सकती है। कोर्ट जांच की मॉनिटरिंग करे यह कहना बिहार सरकार के क्षेत्राधिकार में नहीं है।
मैंने घोटाले का खुलासा किया, चार-पांच दिन की जांच में जैसे ही लगा कि घोटाला बहुत बड़ा है CBI जांच की अनुशंसा कर दी। अब इन्हें CBI पर भी भरोसा नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग कहते हैं कि उनके पास सृजन घोटाले से संबंधित सबूत हैं। अगर किसी के पास मेरे या किसी और के खिलाफ कोई भी सबूत है तो उसे CBI को क्यों नहीं देते? वो जांच कर रही है, अपनी जांच में उस सबूत को यूज कर सकती है।

प्रदेश के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पार्टी कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भागलपुर में श्री यादव ने जिस भाषा का प्रयोग किया वह उनके जैसे नेता को शोभा नहीं देता। वे व्यक्तिगत चरित्र हनन पर उतर आए हैं। हम भी उनके जैसी भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन हमारे संस्कार और संस्कृति इसकी अनुमति नहीं देती है।
उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा दरअसल आयकर विभाग, केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की जांच से घिरे राजद अध्यक्ष इन दिनों हताश और निराश हो गए हैं। हताशा की चरम सीमा उनकी भाषा में दिखाई पड़ रही है। उन्होंने कहा कि राजद अध्यक्ष बोलते समय अपनी भाषा पर नियंत्रण रखें, मर्यादा की लक्ष्मण रेखा पार न करें नहीं तो उल्टा पड़ जाएगा।
उन्होंने कहा कि सृजन घोटाले जांच की मोनेटरिंग सुप्रीम कोर्ट से कराने की मांग करने वाले लालू प्रसाद यादव को रोक कौन रहा है। उनके पास साक्ष्य हैं तो, साक्ष्य के साथ सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दें। दरअसल वे खुद भ्रमित है और राज्य की जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा गठबंधन के समय यह जानकारी होती की लालू प्रसाद के दोनों पुत्र पर बेनामी संपत्ति के मालिक है, तो गठबंधन नहीं करते हैं।
इस घोटाले की जानकारी जैसे ही मुख्यमंत्री को मिली, उन्होंने CBI को इसकी जांच सौंप दी। जबकि लालू प्रसाद खुद मुख्यमंत्री रहते हुए चारा घोटाले की जांच CBI से कराने का विरोध कर रहे थे और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया था।

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