लालच भारत छोड़ो : नीतीश कुमार

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अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पृथ्वी की रक्षा के लिए लालच भारत छोड़ो का नारा दिया। महागठबंधन से अलग हो भाजपा के साथ बिहार में नयी सरकार गठन के बाद से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव लगातार नीतीश कुमार पर हमला बोलते रहे है। जवाब में आज नीतीश कुमार ने इशारों-इशारों में लालू यादव पर निशाना साधा।
बुधवार को बिहार पृथ्वी दिवस के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि आदमी के बढ़ते लालच ने पर्यावरण का हाल खराब कर दिया है। अगर हम अब भी नहीं चेते तो आने वाली पीढ़ी के साथ अन्याय करेंगे। लालची प्रवृत्ति खत्म होने पर ही समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ेगा, हमारा पर्यावरण सुरक्षित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान और तकनीक का प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है। सरकार ने तय किया है कि सभी सरकारी संस्थानों में बड़े पैमाने पर पेड़ लगाए जाएंगे। राज्य की 17 प्रतिशत जमीन पर वन भूमि का विस्तार होगा। पर्यावरण के प्रति बच्चों को जागरूक बनाया जाएगा। बच्चे जागरूक होंगे तो समाज में भी इसके प्रति जागृति आएगी।


मुख्यमंत्री ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का नाम लिए बिना तंज कसा और कहा कि गांधी जी ने कहा था, अंग्रेजों भारत छोड़ो, लेकिन आज लालच भारत छोड़ो नया नारा है। जैसे महात्मा गांधी ने 9 अगस्त को कहा था कि अंग्रेजों भारत छोड़ो वैसे ही मेरे साथ और आपलोग भी कहिये ‘लालच भारत छोड़ो’। इसका कारण यह है कि पृथ्वी हमारी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, लेकिन लालच को पूरा करने में सक्षम नहीं है। लालच में पड़ कर इसका दोहन करना खतरनाक है। वहीं लालची प्रवृत्ति समाज से दूर होगी तो यहां खुशहाली, प्रेम और भाईचारा का विकास होगा।
मुख्यमंत्री ने बालू माफिया पर भी हमला बोलते हुए कहा कि बालू माफिया को जितना बालू खोदने का टेंडर मिलता है, उससे ज्यादा बालू निकालते हैं। इसमें धंधेबाजी हो रही है, यदि इसके खनन की सीमा दो मीटर या एक मीटर होती है तो वे उससे ज्यादा खुदायी करते हैं। इसकी निगरानी करने वाले भी उनसे मिल जाते हैं। उन्होंने कहा है कि बिहार में बहुत घोटालेबाज हो गये हैं, पता नहीं ये घोटालेबाज कहां-कहां से आ गये हैं?
मुख्यमंत्री ने महंगे निजी स्कूलों पर निशाना साधते हुए कहा कि अनेक ऐसे स्कूल हैं जहां बस और क्लास AC है। बच्चा घर में भी AC में रहता है। इस तरह के वातावरण में रहने वाला बच्चा बाहर काम कैसे करेगा? उसके तो पसीने छूट जाएंगे। जरा सी धूप में ही वह बेहोश हो जाएगा। अगर ऐसा बच्चा बड़ा होकर IAS भी बन गया तो फील्ड में कैसे रह पाएगा? हर जगह AC तो नहीं मिलेगा। मुझे चौथी कक्षा में पहली बार पहनने को चप्पल मिली थी। जिसका रंग आज भी मुझे याद है।

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