कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति राबर्ट वाड्रा की मुसीबतें घटने का नाम नहीं ले रही हैं. लंदन के बेनामी संपत्ति मामले में आयकर विभाग ने CBI से भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज कर जांच करने को कहा है.
राबर्ट वाड्रा पर आरोप है कि लंदन में 12, ब्रायंस्टन स्कवायर की संपत्ति को कोरियाई कंपनी सैमसंग इंजीनियरिंग ने ONGC के गुजरात के दहेज में बनने वाले SEZ से जुड़े निर्माण का ठेका मिलने के एवज में दी थी. आयकर विभाग बेनामी संपत्ति कानून और ED मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत लंदन स्थित इस फ्लैट की जांच कर रहा है.
सैमसंग इंजीनियरिंग की ओर से दी गई रिश्वत की रकम से संपत्ति खरीदने के खुलासे के बाद इस भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत इसकी जांच के लिए आयकर विभाग ने CBI को इस संबंध में पत्र लिखा है. आयकर विभाग और ED के अधिकारियों के अनुसार उनके पास राबर्ट वाड्रा की ही बेनामी संपत्ति होने के पुख्ता सबूत हैं.
सैमसंग इंजीनियरिंग को दिसबंर 2008 के दिसबंर में दहेज में बनने वाले SEZ के लिए ठेका मिला था और इसके छह महीने के बाद 13 जून 2009 को सैमसंग ने संजय भंडारी की कंपनी सैनटेक को 49.9 लाख डालर दिया. संजय भंडारी ने बाद में इसमें से 19 लाख पाउंड वोर्टेक्स नाम की कंपनी में ट्रांसफर किया. ED का दावा है कि कि इसी पैसे का इस्तेमाल 12, ब्राइंस्टन स्कवायर की संपत्ति खरीदने के लिए किया गया था.
संजय भंडारी के रिश्तेदार सुमित चढ्डा ने 2010 में इस संपत्ति की मरम्मत के लिए वाड्रा को ईमेल भेजकर अनुमति मांगी थी और फिर बाद में एक अन्य ईमेल से सुमित चढ्डा ने मरम्मत के लिए पैसों की व्यवस्था करने को भी कहा था. जिसके जवाब में वाड्रा ने मनोज अरोड़ा द्वारा पैसों की व्यवस्था कराने का भरोसा दिया था. तब घर की मरम्मत पर लगभग 45 लाख रुपये खर्च किये गए थे. इस संबंध में ED ने राबर्ट वाड्रा से लंबी पूछताछ की है.


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