राहुल गांधी मानसिक रूप से स्वस्थ नही हैं : उमा भारती

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केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए कहा कि राहुल गांधी जो बोलते हैं और जो करते हैं, वह संसद ने देखने को मिला, लेकिन उन्होंने लंदन में जो बोला, उससे तो कांग्रेसी भी सन्न हैं.
उमा भारती ने कहा कि राहुल गांधी ने कहा कि 1984 में कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं थी, जबकि सारे केस कांग्रेस के लोगों पर चले और कई नेताओं को जेल हो गई. ऐसे में जिस व्यक्ति याद ही न रहता हो कि उसे क्या बोलना और क्या करना है, उसके मानसिक रूप से स्वस्थ होने की कामना भगवान से करुंगी. राहुल गांधी मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं.
उमा भारती ने कहा कि राहुल गांधी बहुत बड़ी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष हैं और मुझे तो उस पार्टी की भी चिंता है. क्योंकि उस पार्टी का बैकग्राउंड काफी बड़ा रहा है, उसमें मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे महापुरुष हुए हैं. लेकिन आज एक ऐसा व्यक्ति पार्टी संभाल रहा है, जो मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है. ये पूरी तरह से मानसिक अस्वस्थता का ही लक्षण है, जिसे यही पता न हो कि देश में 1984 में क्या हुआ था?
उमा भारती ने ये बात ब्रिटेन में राहुल गांधी द्वारा ये कहने पर कि कांग्रेस पार्टी की 1984 के दंगों में कोई भूमिका नहीं थी कहने पर अपनी प्रतिक्रिया में कही. उन्होंने भाजपा छोड़ने के सवाल पर कहा कि बीजेपी मैंने नहीं छोड़ा था, बल्कि मुझे निकाला गया था. मेरी पार्टी के प्रति पूरी सहानुभूति है, इसलिए पार्टी जो कहती है मैं करती है.
राहुल गाँधी ने लंदन में आयोजित इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में सिख दंगों को एक ‘बहुत दर्दनाक त्रासदी’ बताते हुए कहा था कि किसी भी शख़्स के साथ हिंसा करने वाले दोषी को सज़ा दिलाने पर 100 फ़ीसदी सहमत हैं. साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि वो इस बात से असहमत हैं कि इन दंगों में कांग्रेस की कोई भूमिका थी. 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक सिख बॉडीगार्ड ने उनकी हत्या कर दी थी जिसके बाद देश भर में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे. इन दंगों में तक़रीबन 3,000 सिखों की हत्या कर दी गई थी.

राहुल गांधी ने कार्यक्रम में अपने पिता राजीव गांधी की हत्या का ज़िक्र करते हुए कहा कि मैं ख़ुद हिंसा का पीड़ित हूं. मैंने उन लोगों की हत्या होते देखा है जो मेरे बहुत प्रिय थे. मैंने अपने पिता की हत्या करने वाले प्रभाकरन को देखा है. 84 दंगों को तीन दशक से ज्‍यादा का समय बीत चुका है लेकिन इसका जिन्‍न आज भी कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा. इन दंगों को लेकर जगदीश टाइटलर, सज्‍जन कुमार, कमलनाथ आदि कुछ कांग्रेसी नेताओं का सियासी भविष्‍य पूरी तरह से खत्‍म हो गया है. इसी वर्ष अप्रैल में जब राहुल गांधी ने केंद्र के विरोध में राजघाट पर अनशन किया तो वहां पर जगदीश टाइटलर और सज्‍जन कुमार की मौजूदगी को लेकर जबरदस्‍त विरोध शुरू हो गया था. इस विरोध के चलते ही इन दोनों नेताओं को वहां से हटाना भी पड़ा था.
राहुल गांधी इन दंगों में कांग्रेस की संलिप्‍तता से इंकार कर रहे हैं लेकिन दंगों के 21 साल बाद उन्हीं की पार्टी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में इसके लिए माफ़ी मांगते हुए कहा था कि जो कुछ भी हुआ, उससे उनका सिर शर्म से झुक जाता है. इन दंगों की आंच और आरोपों से पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्‍हा राव भी नहीं बच पाए थे, 1984 में हुए दंगों के समय वह केंद्रीय गृहमंत्री थे, उनके ऊपर इन दंगों को रोकने में लापरवाही बरतने के आरोप लगे थे.
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सार्वजनिक तौर पर इन दंगों पर जो बयान दिया था वह भी लोगों के गले नहीं उतर सका है. 19 नवंबर, 1984 को उन्‍होंने बोट क्लब में इकट्ठी भीड़ को संबोधित करते हुए कहा था कि जब इंदिरा जी की हत्या हुई थी़, तो हमारे देश में कुछ दंगे-फसाद हुए थे. हमें मालूम है कि भारत की जनता को कितना क्रोध आया, कितना ग़ुस्सा आया और कुछ दिन के लिए लोगों को लगा कि भारत हिल रहा है. जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है. इस बयान को बाद में उनके विरोधियों ने अपने पक्ष में खूब इस्‍तेमाल किया था.


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