बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को भाजपा ने राष्ट्रपति पद का उम्‍मीदवार बनाया है, NDA के बाकी दलों ने भी कोविंद के नाम पर अपनी सहमति जाहिर कर दी। नाम आते ही कांग्रेस ने आम सहमति बनाने की संभावनाओं से इनकार कर दिया।
राष्ट्रपति पद के उम्‍मीदवार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में भाजपा के संसदीय दल की बैठक घंटेभर तक चली। अंतिम फैसले से पहले केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को इस फैसले की जानकारी दी।
बैठक के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने संसदीय बोर्ड में हुए फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पार्टी की ओर से इस संबंध में सहयोगी दलों के साथ ही कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और कई बड़े नेताओं से बात की गई है। 23 तारीख को रामनाथ कोविंद की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने हमेशा की तरह एक बार फिर सबको चौंकाते हुए राष्ट्रपति पद के लिए ऐसा नाम सामने कर दिया जिस पर शायद ही पहले किसी ने अंदाजा लगाया था। बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को सामने रखकर इस जोड़ी ने बड़ा दांव चला, भाजपा के बड़े दलित चेहरे रहे रामनाथ कोविंद राजनीति के भी मंजे हुए खिलाड़ी हैं।
हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले कोविंद को कानून का अच्छा जानकार माना जाता है ऐसे में राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पद पर तमाम तरह की कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर भी उनका अनुभव काम आ सकता है।

राष्ट्रपति पद के लिए दलित चेहरे का नाम आगे कर भाजपा ने दलितों की राजनीति करने वाले नेताओं को एक बार फिर खाली हाथ करने की तैयारी कर ली है। उनकी उम्‍मीदवारी का समर्थन न करना काफी मुश्किल होगा और कई सवाल खड़े करेगा। कोविंद की उम्‍मीदवारी के साथ ही उन्हें समर्थन मिलने का सिलसिला भी शुरू हो गया। तेलगांना के मुख्यमंत्री और TRS पार्टी के प्रमुख केसी राव ने इस पद के लिए कोविंद के समर्थन की घोषणा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्विटर पर कहा कि- “कोविंद ने अपना पूरा जीवन गरीबों के लिए समर्पित कर दिया। वो किसान के बेटे हैं।“ मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, आंध्रा के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानिसामी से बातचीत भी की।
राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये गये रामनाथ कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में हुआ। कानपुर यूनिवर्सिटी से बीकॉम और एल.एल.बी की पढ़ाई कर 1971 में दिल्ली बार काउंसिल में वकील के रूप में इनरोल हुए और जल्द ही उनकी गिनती दिल्ली हाईकोर्ट के अच्छे वकीलों में होने लगी। 30 मई 1974 को सविता कोविंद से शादी हुई, पुत्र प्रशांत कुमार और पुत्री स्वाति है। 1977 में PM मोरारजी देसाई के पर्सनल सेक्रेटरी बने। 1978 से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरु कर 1993 तक दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस की, इस दौरान SC में केंद्र की स्टैंडिंग काउंसिल में भी रहे।
अप्रैल 1994 में राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुयी, मार्च 2006 तक (12 वर्ष) राज्यसभा सांसद रहने के दौरान शेड्यूल कास्ट/ट्राइब्स वेलफेयर पार्लियामेंट्री कमेटी, पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन होम अफेयर्स, पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस, पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन सोशल जस्टिस एंड एम्पॉवरमेंट, पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन लॉ एंड जस्टिस के मेंबर रहे। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी, लखनऊ के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य तथा IIM कोलकाता के बोर्ड ऑफ गवर्नर के मेंबर रहे। 2002 में यूनाइटेड नेशन के जनरल एसेंबली में भारत को रिप्रजेंट किया और 2002 की जनरल असेंबली में स्पीच भी दी।

उन्हें कमजोर वर्ग के लोगों के हक के लिए संघर्ष करने के लिए जाना जाता है। 1997 में केंद्र सरकार द्वारा कुछ ऐसे फैसले लिए गए थे, जिससे अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाला था। तब वो एससी,एसटी कर्मचारियों द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे मूवमेंट में शामिल हुए और सरकार के आदेश को खत्म कराकर ही माने। सांसद रहने के दौरान उन्होंने गांव में बुनियादी शिक्षा के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर बल दिया था।
समाज के कमजोर तबके को मुफ्त में कानूनी सहायता मिले इसके लिए दिल्ली में फ्री लीगल एड सोसाइटी बनाई। दलित बीजेपी मोर्चा के अध्यक्ष रहे। ऑल इंडिया कोली समाज के प्रेसिडेंट हैं। भाजपा के स्पोक्सपर्सन रह चुके हैं, लेकिन विवादों और TV से दूरी बनाकर रखी। राष्ट्रपति ने 8 अगस्त 2015 को इन्हें बिहार का गवर्नर अप्वाइंट किया।
शिवसेना प्रमुख उद्वव ठाकरे ने कहा कि रामनाथ कोविंद के नाम के बारे में अमित शाह ने बात की थी, हम कुछ दिनों में समर्थन पर निर्णय करेंगे। जदयू नेता शरद यादव ने कहा कि विपक्षी दलों की बैठक में नाम पर विचार करेंगे, NDA ने जो नाम दिया है उसपर भी बात करेंगे। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी से बात करके फैसला लेंगे। पटना में रामनाथ कोविंद ने नीतीश कुमार से बात की और उन्हें चाय पर बुलाया।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा कोविंद के नाम की घोषणा करने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने आम सहमति बनाने की संभावनाओं से इनकार करते हुए कहा कि सरकार ने अपना निर्णय हमें बताया, न कि कुछ नामों पर चर्चा की। सरकार की तरफ से आम सहमति बनाने की कोशिश ही नहीं की गई।
आजाद ने कहा कि सरकार आम सहमति की गुंजाइश की अपेक्षा कैसे कर सकती है? भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायुडू जब बात करने आए थे, हमें उम्मीद थी कि अपने साथ वो कुछ नाम लाए होंगे, जिनपर चर्चा होगी। पर वैंकेया बिना किसी नाम के ही हमसे बातचीत करने आ गए।

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