राष्ट्रपति ने विदाई समारोह में संसद के अपने पहले दिन को किया याद

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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित अपने विदाई कार्यक्रम में अपने संसदीय कार्यकाल का जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व PM मनमोहन सिंह, भाजपा के वरिष्ठ सांसद लालकृष्ण आडवाणी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए कहा कि इन तमाम वरिष्ठ सदस्यों के भाषणों से हमने सीख ली.


राष्‍ट्रपति ने कहा कि अगर मैं यह दावा करूं कि मैं इस संसद की रचना हूं तो शायद इसे अशिष्‍टता नहीं समझा जाएगा. मुझे लोकतंत्र के इस मंदिर ने, इस संसद ने तैयार किया है. 22 जुलाई 1969 को पहला राज्यसभा सत्र अटेंड किया था. उन्होंने बताया कि मैं 34 साल की उम्र में पहली बार सांसद के रूप में राज्यसभा पहुंचा. संसद ने मेरे राजनीतिक दृष्टि को दिशा दी. संसद में 37 साल का सफर 13वें राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने के बाद ख़त्म हुआ था, फिर भी जुड़ाव वैसा ही रहा.
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि देश की एकता संविधान का आधार है. मुखर्जी ने ये भी कहा कि पहले संसद में गंभीर चर्चा होती थी. संसद में पक्ष और विपक्ष में बैठते हुए मैंने समझा कि सवाल पूछना और उनसे जुड़ना कितना ज़रूरी है. जब संसद में किसी व्यवधान की वजह से कार्रवाई नहीं हो पाती है तो लगता है कि देश के लोगों के साथ गलत हो रहा है. मैंने बहुत से बदलाव देखे, हाल ही में GST का लागू होना भी गरीबों को राहत देने की दिशा में एक बड़े कदम का उदाहरण है.


मुखर्जी ने लोकसभा स्पीकर और उपराष्ट्रपति का भी धन्यवाद किया. साथ ही संसद के सभी सदस्यों का अभिवादन स्वीकार किया. राष्ट्रपति के लिए रविवार को आयोजित विदाई कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन समेत दोनों सदन के लगभग सभी सदस्य मौजूद रहे. इनमें पूर्व PM मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी भी मौजूद थीं. सोमवार को प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल का आखिरी दिन है. नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को शपथ लेंगे.

राष्ट्रपति के विदाई कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने विदाई भाषण के दौरान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के राजनीतिक कैरियर का बखान करते हुए उनकी उपलब्धियां भी गिनवायीं. उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी ने हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी. इसके बाद सुमित्रा महाजन ने राष्ट्रपति को विदाई भाषण की एक प्रति तथा सांसदों द्वारा हस्‍ताक्षरित एक पुस्‍तक मुखर्जी को भेंट की.
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपने भाषण में बताया कि कैसे प्रणब मुखर्जी ने संसद में रहने के दौरान वहां बहस के स्तर को बढ़ाया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से पहले आप विश्व के सर्वश्रेष्ठ विदेश मंत्री रहे. साथ ही वित्त मंत्रालय में भी आपने शानदार काम किया.
संसद सदस्यों के वक्तव्य का सारांश यह रहा कि मुखर्जी एक ऐसी शख्सियत हैं जो देश की राजनीति और अर्थशास्त्र को श्रेष्ठतम संभव तरीके से जानता है. संसद में सबसे वरिष्ठ सदस्यों में से एक रहे मुखर्जी बेहद अच्छी तरह जानते थे कि किस तरीके से एक मंत्री या सदस्य को आचरण करना चाहिये. वह जानते थे कि सरकार के लिये परेशानी खड़ी किये बिना संविधान की रक्षा- सुरक्षा कैसे करनी है.


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