‘राष्ट्रगान’ और ‘राष्ट्रीय गीत’ में अंतर जानें

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स्वतंत्रता दिवस की 72वीं वर्षगांठ के मौके हम जानें अपने ‘राष्ट्रगान’ और ‘राष्ट्रीय गीत’ के बारे में. “राष्ट्रगान” की रचना रविंद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1911 में की थी, जिसे पहली बार 27 दिसंबर 1911 को कोलकाता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में गाया गया था. “राष्ट्रीय गीत” की रचना 1882 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी. इसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में गाया गया था. दोनों की अवधि लगभग 52 सेकेंड है.
‘राष्ट्रगान’ और ‘राष्ट्रीय गीत’ किसी भी देश की वो धरोहर होती हैं, जिससे उस राष्ट्र की पहचान जुड़ी हुई होती है. प्रत्येक राष्ट्र के ‘राष्ट्रगान’ और ‘राष्ट्रीय गीत’ की भावनाएं भले ही अलग हों, लेकिन अंतत: इससे राष्ट्रभक्ति की ही अभिव्यक्ति होती है.
भारत का राष्ट्रगान :-
जन-गण-मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्य विधाता।
पंजाब-सिंधु-गुजरात-मराठा
द्राविड़-उत्कल-बंग
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा
उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशीष मांगे
गाहे तव जय-गाथा।
जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्य विधाता।
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।
भारत के राष्ट्रगान को हमारी संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को स्वीकार किया, जिसे अनेक अवसरों पर बजाया या गाया जाता है. रविंद्रनाथ टैगोर इसे मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखा था, बाद में इसका हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद कराया गया. राष्ट्रगान में सिंध का भी नाम था लेकिन बाद में इसमें संशोधन कर सिंध की जगह सिंधु कर दिया गया, क्योंकि देश के विभाजन के बाद सिंध पाकिस्तान का अंग हो चुका था. राष्ट्रगान जब भी कहीं बजाया जाता है तो देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होता है कि वो अगर कहीं बैठा हुआ है तो उस जगह पर सावधान मुद्रा में खड़ा हो जाए. साथ ही नागरिकों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वो भी राष्ट्रगान को दोहराएं.


राष्ट्रगान के अंग्रेजी संस्करण से हिंदी में अनुवादित करें तो ‘जन-गण-मन’ का अर्थ है-
‘सभी लोगों के मस्तिष्क के शासक, कला तुम हो,
भारत की किस्मत बनाने वाले।
तुम्हारा नाम पंजाब, सिन्धु, गुजरात और मराठों के दिलों के साथ ही बंगाल, ओडिसा, और द्रविड़ों को भी उत्तेजित करता है,
इसकी गूंज विन्ध्य और हिमालय के पहाड़ों में सुनाई देती है।
गंगा और जमुना के संगीत में मिलती है और भारतीय समुद्र की लहरों द्वारा गुणगान किया जाता है।
वो तुम्हारे आशीर्वाद के लिये प्रार्थना करते हैं और तुम्हारी प्रशंसा के गीत गाते हैं।
तुम्हारे हाथों में ही सभी लोगों की सुरक्षा का इंतजार है,
तुम भारत की किस्मत को बनाने वाले।
जय हो जय हो जय हो तुम्हारी।’
भारत का राष्ट्रीय गीत:-
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्यश्यामलाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्!
शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥
भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इसकी रचना 1882 में संस्कृत और बांग्ला मिश्रित भाषा में किया था. यह स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था. इसे भी भारत के राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के बराबर का ही दर्जा प्राप्त है. ‘वंदे मातरम्’ का चयन राष्ट्रगान के तौर पर हो सकता था लेकिन कुछ मुसलमानों के विरोध के कारण इसे राष्ट्रगान का दर्जा नहीं मिला. मुसलमानों का कहना था कि इस गीत में मां दुर्गा की वंदना की गई है और उन्हें राष्ट्र के रूप में देखा गया है, जबकि इस्लाम में किसी व्यक्ति या वस्तु की पूजा करना गलत माना गया है.
राष्ट्रीय गीत का हिंदी अनुवाद
मैं आपके सामने नतमस्तक होता हूं। ओ माता,
पानी से सींची, फलों से भरी,
दक्षिण की वायु के साथ शांत,
कटाई की फसलों के साथ गहरा,
माता!
उसकी रातें चांदनी की गरिमा में प्रफुल्लित हो रही है,
उसकी जमीन खिलते फूलों वाले वृक्षों से बहुत सुंदर ढकी हुई है,
हंसी की मिठास, वाणी की मिठास,
माता, वरदान देने वाली, आनंद देने वाली।

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